तस्वीर में साध्वी सुधा कंवर सफेद वस्त्र और मुखापढ़ पहने हुए नजर आ रही हैं।

मुंबई। पर्युषण महापर्व आत्मशुद्धि और आत्मजागरण का अवसर है। इस दौरान व्यक्ति को अपने पापों की आलोचना कर प्रतिक्रमण करना चाहिए। धर्मसभा को संबोधित करते हुए साध्वी सुधा कंवर ने कहा कि पापों की आलोचना और प्रायश्चित करने से कर्मों का भार हल्का होता है तथा व्यक्ति आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ता है।

साध्वी सुयशा ने कहा कि परमात्मा महावीर को सम्यक रूप से मानने के लिए आवश्यक है कि पहले उन्हें सम्यक रूप से जाना और समझा जाए। केवल महावीर के नारे लगाने से जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आएगा। यदि वास्तव में भगवान महावीर के प्रति श्रद्धा और भक्ति है तथा उन्हें अपना आराध्य माना जाता है, तो उनके सिद्धांतों की झलक व्यक्ति के आचार, विचार, व्यवहार और जीवनशैली में दिखाई देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के प्रति सच्ची श्रद्धा तभी सार्थक होगी, जब उनके बताए अहिंसा, संयम, सत्य और आत्मानुशासन के मार्ग को जीवन में उतारा जाए। पर्युषण पर्व इसी आत्मचिंतन और आत्मपरिवर्तन की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर मेवाड़ संघ पनवेल की सभी संघीय संस्थाओं के पदाधिकारी एवं श्रावक समाज उपस्थित रहे। यह जानकारी संघ अध्यक्ष शैलेन्द्र खेरोदिया ने दी।

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