बीएमसी का बड़ा फैसला: मुंबई की झुग्गियों में स्वच्छता के लिए जीपीएस ट्रैकिंग
पुरानी प्रबोधन योजना की जगह शुरू होगी बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा, 10 हजार से अधिक इकाइयों में जीपीएस और फोटो से होगी पारदर्शी निगरानी।
घनी झुग्गी-झोपड़ियों के मकान मुंबई के स्लम क्षेत्र में स्थित हैं।
मुंबई। मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में सफाई व्यवस्था को अधिक बेहतर और पारदर्शी बनाने के लिए बीएमसी प्रशासन ने नई तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। लगभग 13 साल पहले शुरू किए गए स्वच्छ मुंबई प्रबोधन अभियान को नया रूप देते हुए बीएमसी अब ‘बृहन्मुंबई स्वच्छता सेवा योजना’ शुरू कर रही है। इसके तहत शहर के सभी 24 प्रशासनिक वार्डों की स्लम बस्तियों में सफाई कार्य की सीधे तकनीक के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
यह नई व्यवस्था बीएमसी के नियमित सफाई नेटवर्क से छूटी हुई करीब 10,309 सफाई इकाइयों में लागू की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए बीएमसी का ठोस कचरा प्रबंधन विभाग हर साल लगभग 136 करोड़ रुपये का बजट खर्च करेगा। पुरानी व्यवस्था में सफाई कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय नागरिकों और पार्षदों की ओर से लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। इन शिकायतों का स्थायी समाधान निकालने और सफाई व्यवस्था को जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से यह नई पहल की गई है।
नई प्रणाली के तहत ठेकेदारों और सफाई कर्मचारियों को काम शुरू करने से पहले और काम पूरा होने के बाद की तस्वीरें बीएमसी पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था की पारदर्शी निगरानी के लिए जीपीएस आधारित रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके माध्यम से बीएमसी के वरिष्ठ अधिकारी दफ्तर में बैठे-बैठे यह देख सकेंगे कि संबंधित इलाके में समय पर कचरा उठाया गया है या नहीं।
बीएमसी प्रशासन का मानना है कि तकनीक आधारित इस नई व्यवस्था से मुंबई की झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लाखों नागरिकों को साफ-सुथरा माहौल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही मानसून के दौरान फैलने वाली बीमारियों पर रोक लगाने में भी यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस तरह फोटो अपलोडिंग और जीपीएस निगरानी के जरिए स्लम क्षेत्रों की सफाई व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बीएमसी ने कदम बढ़ाया है।