ग्रैंड नालंदा सभागार में मंच पर बैठकर श्रद्धालुओं को संबोधित करतीं साध्वी निर्वाणश्री।

पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन व्रतचेतना जागरण की प्रेरणा के साथ भगवान महावीर की दिव्य-भव्य जीवन झांकी प्रस्तुत की गई। ग्रैंड नालंदा सभागार में आयोजित कार्यक्रम में युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर का जीवन चरित्र आत्म विकास की प्रेरणा है और आलोक-दीप है।

साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि माता-पिता भगवान महावीर को संसार में बसाना चाहते थे, जबकि भगवान महावीर महाव्रतों के महापथ पर बढ़ना चाहते थे। साधना पथ पर आगे बढ़ने से पूर्व उन्होंने माता-पिता के आदेश को शिरोधार्य किया। 30 वर्ष के भरे यौवन में वे समस्त भौतिक सुविधाओं को अलविदा कर महापथ के राही बन गए।


साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने भगवान अरिष्टनेमि और वासुदेव श्रीकृष्ण से जुड़े रोचक एवं प्रेरक संस्मरण प्रस्तुत किए। आगमवाणी में दान, तप व वंदना आदि की महत्ता बताते हुए उन्होंने श्रद्धालुओं को भाव-भक्ति के लिए भी प्रेरित किया।

साध्वी लावण्यप्रभा ने व्रत-चेतना जगाने की प्रेरणा देते हुए जीवन को नैतिक व प्रामाणिक बनाने पर जोर दिया। कार्यक्रम में नगरसेविका आशा ताई ने दर्शन किए। साध्वी मधुरप्रभाजी ने मधुर संगान के माध्यम से व्रतों के दीप जलाने की प्रेरणा दी। सामीनाका महिला मंडल ने अनुव्रत से सम्बद्ध गीत के साथ मंगलाचरण किया।

रात्रिकालीन कार्यक्रमों में प्रतिक्रमण के पश्चात प्रतिदिन साध्वी एवं साध्वीवृंद का प्रेरक प्रेरणा पाथेय प्रस्तुत किया जा रहा है। इसके साथ तेमम् की युवती बहनों, ज्ञानशाला और कन्यामंडल के ज्ञानवर्धक विविध उपक्रमों से जनता लाभान्वित हो रही है। तेरापंथ के जैन जी एवं जैन अल्फा का साध्वी योगक्षेमप्रभा द्वारा प्रस्तुत विलक्षण कार्यक्रम अतीव प्रेरणादायी रहा। मंच संचालन पूर्व अध्यक्ष रमेश धोका ने किया।

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