उरमाल में आयोजित कार्यक्रम में बैनर के आगे समूह में खड़े और बैठे श्रद्धालु।

मुंबई से कुसुम बडाला डोंबिवली और कुसुम हिरण चेम्बूर पर्युषण पर्व के अवसर पर अणुव्रत चेतना दिवस के रूप में उपासना के लिए छत्तीसगढ़ के उरमाल क्षेत्र पहुँचीं। उरमाल में आयोजित कार्यक्रम में अणुव्रत के महत्व और 12 व्रत के आध्यात्मिक प्रभाव पर विस्तार से जानकारी दी गई।

दिवस की शुरुआत ‘रोम रोम है नमन’ गीतिका के माध्यम से हुई। इस अवसर पर कुसुम बडाला ने बताया कि आचार्य तुलसी ने धर्मसंघ को अणुव्रत का अवदान दिया। उन्होंने अणुव्रत से जुड़े विषय पर विस्तार से जानकारी साझा की।

उपासिका कुसुम हिरण ने 12 व्रत के महत्व की विवेचना करते हुए बताया कि इन व्रतों को करने से कितने पापों से बचा जा सकता है। उन्होंने श्रावकों को 12 व्रत बुक भरने के लिए भी प्रेरित किया।

कार्यक्रम में जैन श्वेताम्बर तेरापंथी उपसभा उरमाल के संयोजक पवनकुमार जैन, उपसंयोजक सुशीलकुमार जैन, अमृतलाल जैन सहित अनेक श्रावकों की उपस्थिति रही।

उरमाल में सभी कर्मणा तेरापंथी परिवारों की गुरु के प्रति बहुत ही श्रद्धा है। सभी परिवारों की हर समय बहुत ही अच्छी उपस्थिति हो रही है। पर्युषण पर्व के दौरान अणुव्रत चेतना दिवस के आयोजन ने 12 व्रत के महत्व और उनके पालन के संदेश को प्रमुखता से सामने रखा।

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