पालघर जिले के वसई तालुका के सातिवली में आदिवासी समाज को आवंटित जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में वालीव पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। समाजसेवक टेरेंस आर. हैंडिक्स ने इस मामले को उजागर करते हुए आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतों की जांच के बाद वसई तहसीलदार ने संबंधित दस्तावेजों को फर्जी पाए जाने के आधार पर वालीव पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया।

सूत्रों के अनुसार, मामला सर्वे नंबर 38, हिस्सा नंबर 4, मौजे सातिवली, तालुका वसई, जिला पालघर स्थित उस जमीन से जुड़ा है, जो आदिवासी समाज के लोगों को आवंटित की गई है। आरोप है कि इस जमीन के संबंध में कुछ लोगों ने कथित तौर पर फर्जी बिक्री अनुमति आदेश तैयार किए, सरकारी मुहर का दुरुपयोग किया और सरकारी कार्यालयों में आवश्यक दस्तावेज तैयार कराए। इन दस्तावेजों का सरकारी पंजीकरण में इस्तेमाल कर निर्माण अनुमति प्राप्त की गई और इसके आधार पर व्यावसायिक भूखंड बेच दिए गए।

समाजसेवक टेरेंस आर. हैंडिक्स ने शिकायत पत्रों के माध्यम से इस कथित घोटाले को उजागर किया। उन्होंने 7 फरवरी 2025 को वसई के तहसीलदार के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 26 मई 2025 को ठाणे और पालघर के जिला कलेक्टरों को स्मरण पत्र भेजा गया। इसमें कथित फर्जी आदेशों की विस्तृत जांच, संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी।

शिकायतों की जांच शुरू होने पर वसई तहसीलदार ने पाया कि बिल्डरों द्वारा कार्यालय में जमा कराए गए दस्तावेज फर्जी थे। इसके आधार पर तहसीलदार ने वालीव पुलिस थाने में संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई।

पुलिस ने इस मामले में शुभकरण मखारिया और मखारिया के दूसरे वारिस, उन्नत कृष्ण पाटिल, आशीष कृष्ण चौधरी, ललित नागिनदास दोशी, दिलीप सेबेस्टियन डाबरे, इंतेखाब आलम कुरैशी तथा अन्य लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2), 316(5), 318(4), 336(2), 336(3), 338, 340(2), 341(1) और 341(2) के साथ ही पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 82 के तहत कार्रवाई की गई है।

मामला दर्ज होने के बाद टेरेंस आर. हैंडिक्स ने निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि कथित फर्जी दस्तावेजों का आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर सत्यापन किया जाना चाहिए और संबंधित जमीन के हस्तांतरण की कानूनी वैधता की जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी मांग की कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।

हैंडिक्स ने राजस्व और पुलिस प्रशासन से आदिवासी जमीन के वास्तविक मालिकों के कानूनी अधिकारों की रक्षा करने तथा हकदार अधिकारधारकों को कानून के अनुसार न्याय दिलाने के लिए समन्वित कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा, “आदिवासी जमीनों की सुरक्षा, सरकारी कागजात की सच्चाई और प्रशासनिक पारदर्शिता सबसे जरूरी हैं। मैं मांग करता हूं कि इस मामले में हर आरोप की बिना किसी भेदभाव के जांच हो, सच्चाई सामने आए और जो दोषी पाए जाएं, उन पर कानून के मुताबिक मुकदमा चले।”

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