भातसा बांध के जलभंडार आंकड़ों में एक हफ्ते में भारी गिरावट, बीएमसी में तेजिंदर सिंह तिवाना ने उठाए सवाल
बीएमसी स्थायी समिति की बैठक में नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने भातसा बांध के पानी के आंकड़ों में एक हफ्ते के भीतर आई गिरावट पर सवाल उठाए।
मुंबई में बीएमसी स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत जलभंडार रिपोर्ट, जिसमें 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भातसा बांध का उपयोगी जलभंडार 69.29 प्रतिशत दर्शाया गया है, जिसे लेकर नगरसेवक तेजिंदर सिंह तिवाना ने आंकड़े छिपाने और लापरवाही के सवाल उठाए।
मुंबई में भातसा बांध के जलभंडार के आधिकारिक आंकड़ों में महज एक सप्ताह के भीतर भारी अंतर सामने आने से बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की स्थायी समिति की बैठक में हंगामा हो गया। नगरसेवक और स्थायी समिति के सदस्य तेजिंदर सिंह तिवाना ने प्रशासन की रिपोर्ट में दर्ज आंकड़ों पर कड़ा विरोध जताते हुए इस अंतर पर स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने कहा कि जलभंडार के आंकड़ों में इतने कम समय में आया अचानक बदलाव चिंताजनक और संदेहास्पद है। इससे मुंबई के नागरिकों में भ्रम और डर का माहौल बन गया है।
स्थायी समिति के समक्ष प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 3 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट में भातसा बांध का उपयोगी जलभंडार 98.13 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इसके ठीक एक सप्ताह बाद, 10 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई साप्ताहिक रिपोर्ट में जलभंडार का स्तर घटकर सीधे 69.29 प्रतिशत दर्शाया गया। महज सात दिनों के भीतर आंकड़ों में आई इस बड़ी गिरावट ने प्रशासन की रिपोर्टिंग प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तेजिंदर सिंह तिवाना ने इस अंतर को लेकर बीएमसी प्रशासन से जवाब मांगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह आंकड़ों में छपाई की गलती है, बांध से बड़े पैमाने पर पानी का रिसाव हो रहा है या फिर प्रशासन मुंबईकरों से जलभंडार की वास्तविक स्थिति छिपा रहा है? उन्होंने इतने कम समय में दर्ज किए गए इस बदलाव को गंभीर मामला बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
तिवाना ने मांग की कि बीएमसी प्रशासन इस मामले में तत्काल अपनी सफाई पेश करे और स्थायी समिति के साथ-साथ मुंबई की जनता को जलभंडार के सही और सटीक आंकड़े उपलब्ध कराए। उनका कहना है कि आधिकारिक आंकड़ों में सामने आए इतने बड़े अंतर पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है, ताकि नागरिकों के बीच व्याप्त भ्रम दूर हो सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस गंभीर लापरवाही को लेकर तत्काल स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो आने वाले समय में मुंबईकरों को पानी के भयंकर संकट का सामना करना पड़ सकता है। भातसा बांध के जलभंडार से जुड़े आंकड़ों में सामने आया यह अंतर अब बीएमसी प्रशासन के लिए जवाबदेही का सवाल बन गया है। प्रशासन की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण और जलभंडार की वास्तविक स्थिति के सटीक आंकड़े सामने आना महत्वपूर्ण होगा।