नालासोपारा: विरार के मशहूर बिजनेसमैन और निदान हेल्थकेयर के डायरेक्टर डॉ. नितिन थोरवे के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में मुंबई हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। इस बीच, डॉ. थोरवे ने पुलिस पर केस में समझौता कराने के लिए पुलिस कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम पर 15 करोड़ रुपये मांगने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के बाद पुलिस कमिश्नर ने क्राइम ब्रांच को जांच के आदेश दिए हैं।

डॉ. नितिन थोरवे ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें मामले से बाहर निकालने और केस का निपटारा करने के लिए बार-बार संपर्क किया। थोरवे के मुताबिक, इस दौरान उनसे 15 करोड़ रुपये की मांग की गई। हालांकि, पुलिस की ओर से लगाए गए इन आरोपों की जांच शुरू कर दी गई है।

मामले की शुरुआत वर्ष 2001 में हुई थी, जब डॉ. थोरवे ने दहिसर के मेस्त्री परिवार से विरार में एक प्लॉट का सौदा किया था। इस सौदे के तहत उन्होंने मेस्त्री परिवार को 66 लाख रुपये दिए थे। इसके बावजूद जुलाई 2026 में मेस्त्री परिवार ने डॉ. थोरवे के खिलाफ 20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया।

डॉ. थोरवे ने इस मामले में हैरानी जताई थी कि जब प्लॉट के सौदे से जुड़े सभी लेन-देन पूरे हो चुके थे, तो अचानक उनके खिलाफ धोखाधड़ी का केस कैसे दर्ज हो गया। धोखाधड़ी की कथित रकम करोड़ों रुपये में होने के कारण पुलिस ने मामले को एंटी-एक्सटॉर्शन स्क्वॉड को ट्रांसफर कर दिया था।

इसके बाद डॉ. थोरवे ने मुंबई हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने मेस्त्री परिवार को दी गई रकम से संबंधित सभी सबूत कोर्ट में जमा किए। इन दस्तावेजों के आधार पर हाई कोर्ट ने मामले में रोक लगा दी।

इस बीच, डॉ. थोरवे ने बोलिंज पुलिस स्टेशन के असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रूपेश दलवी, एंटी-एक्सटॉर्शन स्क्वॉड के पुलिस सब-इंस्पेक्टर शिवाजी खाड़े और अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि इन पुलिस अधिकारियों ने उन्हें इस मामले से बाहर निकालने के लिए बार-बार संपर्क किया और केस निपटाने के लिए 20 करोड़ रुपये की मांग की।

डॉ. थोरवे ने आरोप लगाया कि पुलिस बड़े बिजनेसमैन को मामलों में फंसाकर उनसे पैसे वसूल रही है। उन्होंने इस कथित वसूली की तुलना मुंबई के विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाझे द्वारा की जा रही वसूली से की।

इन आरोपों के बाद पुलिस कमिश्नर निकेत कौशिक ने मामले की जांच क्राइम ब्रांच के असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर को सौंप दी है। पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों की जांच अब क्राइम ब्रांच करेगी।

वहीं, असिस्टेंट पुलिस इंस्पेक्टर रूपेश दलवी ने मामले में अपनी भूमिका से इनकार किया है। दलवी ने कहा कि इस जांच से उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. थोरवे गुस्से में आरोप लगा रहे हैं कि उन्होंने ही केस दर्ज कराया है।

हाई कोर्ट द्वारा धोखाधड़ी के मामले पर रोक लगाए जाने और पुलिस पर करोड़ों रुपये मांगने के आरोपों के बाद यह मामला अब कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ पुलिस जांच के दायरे में भी आ गया है।

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