मुंबई में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कर्मचारियों और शिक्षकों को दिवाली पर 33,000 रुपये बोनस दिया जाएगा। मुंबई की महापौर श्रीमती रितू तावड़े ने इस वर्ष कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए बोनस की घोषणा की है। नियमित वेतन के साथ बोनस की राशि 2 नवंबर को उनके बैंक खातों में जमा की जाएगी।

महापौर के आधिकारिक कक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में यह निर्णय लिया गया। बैठक में बीएमसी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी किशोर गांधी, देवीदास क्षीरसागर और श्रमिक यूनियनों के कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे। महापौर ने बताया कि बीएमसी के कुल 93,509 कर्मचारी और 2,360 शिक्षिकाएं इस बोनस का लाभ उठाएंगी।

महापौर रितू तावड़े के अनुसार, पिछले वर्ष यानी 2024-25 में कर्मचारियों को 31,000 रुपये बोनस दिया गया था। इस वर्ष कर्मचारियों की मांग को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने 32,000 रुपये बोनस देने की सिफारिश की थी। हालांकि, महापौर ने अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए इसमें 1,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की। इसके बाद बोनस की राशि बढ़कर 33,000 रुपये हो गई।

महापौर ने घोषणा की कि 2 नवंबर को कर्मचारियों का नियमित वेतन और बोनस की राशि एक साथ उनके बैंक खातों में स्थानांतरित की जाएगी। इससे बीएमसी कर्मचारियों और शिक्षकों को त्योहार के अवसर पर आर्थिक लाभ मिलेगा और वे अपने परिवार के साथ दिवाली मना सकेंगे।

बोनस की घोषणा के साथ महापौर ने नागरिक सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी अपना रुख स्पष्ट किया। बीएमसी स्कूलों में खराब चावल मिलने की शिकायतों पर उन्होंने सख्ती दिखाते हुए कहा कि यदि किसी संस्था की ओर से बच्चों को खराब खाना परोसा जा रहा है, तो उसका लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।

स्कूलों में घटिया गुणवत्ता वाले टैब दिए जाने के मामले में भी महापौर ने बीएमसी आयुक्त से जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, आशा स्वयंसेविकाओं की बोनस संबंधी मांग पर उन्होंने सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया।

महापौर ने बताया कि आशा स्वयंसेविकाओं का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिला था। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बीएमसी आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिडे के साथ बैठक की जाएगी और एक सकारात्मक एवं सम्मानजनक रास्ता निकाला जाएगा।

इस तरह बीएमसी कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए 33,000 रुपये बोनस की घोषणा के साथ महापौर ने स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता, टैब वितरण और आशा स्वयंसेविकाओं की मांगों से जुड़े मामलों पर भी प्रशासनिक कार्रवाई और समाधान की दिशा में पहल करने की बात कही है।

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