बीएमसी अस्पतालों में मरीजों के खाने की गुणवत्ता पर सवाल, स्थायी समिति की फटकार के बाद बनेगी जांच टीम
मुंबई के बीएमसी अस्पतालों में मरीजों के भोजन की गुणवत्ता और ठेकों पर स्थायी समिति ने गंभीर सवाल उठाए। घटिया खाद्य सामग्री, दरों में अंतर और स्वच्छता की अनदेखी के बीच जानिए प्रशासन को क्यों लगाई गई फटकार और क्या होगी जांच।
मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) द्वारा संचालित अस्पतालों में मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और खाद्य आपूर्ति के ठेकों को लेकर स्थायी समिति की बैठक में गंभीर सवाल उठे। नगरसेवकों ने अस्पतालों में परोसे जा रहे भोजन के घटिया स्तर पर चिंता जताते हुए प्रशासन और ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। मरीजों के पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े इस मुद्दे पर समिति ने प्रशासन को फटकार लगाई और भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की।
बैठक में दाल, सब्जियां, दूध, अंडे, ब्रेड और चावल जैसी जरूरी खाद्य सामग्रियों की दरों, गुणवत्ता और पोषण मूल्य को लेकर सवाल उठाए गए। नगरसेवकों ने कहा कि कम कीमत में टेंडर हासिल करने की होड़ का खामियाजा गरीब मरीजों की सेहत को नहीं भुगतना चाहिए। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान के लिए स्वतंत्र खाद्य गुणवत्ता जांच दल गठित करने और ठेकेदारों के गोदामों पर अचानक छापेमारी करने की मांग की।
चर्चा के दौरान नगरसेविका यामिनी जाधव, जमीर कुरैशी, प्रीति सातम और यशवंत किल्लेदार ने प्रशासन द्वारा निर्धारित अनुमानित दरों और ठेकेदारों की ओर से दी गई बोलियों के बीच बड़े अंतर पर सवाल उठाए। उन्होंने एक ही कंपनी की बोली और रसोई कर्मचारियों द्वारा स्वच्छता मानकों की अनदेखी को लेकर भी चिंता जताई।
नगरसेवकों ने कहा कि बीएमसी अस्पतालों में भर्ती होने वाले अधिकांश मरीज गरीब परिवारों से आते हैं। ऐसे में उनके जल्द स्वस्थ होने के लिए अस्पताल में मिलने वाला पौष्टिक आहार महत्वपूर्ण सहारा होता है। भोजन की गुणवत्ता में किसी भी तरह की कमी मरीजों के स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है।
नगरसेवक यशोधर फणसे ने कहा कि शताब्दी अस्पताल जैसी कुछ जगहों पर भोजन की स्थिति ठीक है, लेकिन सभी बीएमसी अस्पतालों में एक समान और उच्च गुणवत्ता का खाना मिलना जरूरी है। उन्होंने अस्पतालों में भोजन की गुणवत्ता को लेकर समान मानक सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा कि तीन साल के लंबे ठेके इसलिए प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि हर साल टेंडर प्रक्रिया में होने वाली देरी से बचा जा सके। अधिकारियों के अनुसार, खाद्य सामग्री की कीमतें वाशी एपीएमसी मार्केट की दरों के आधार पर तय की गई हैं। मरीजों के लिए आहार भी विशेषज्ञों की सलाह से तैयार किया जाता है।
हालांकि, स्थायी समिति ने प्रशासन के तर्कों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मरीजों का स्वास्थ्य सर्वोपरि है। समिति ने कहा कि यदि कोई ठेकेदार खराब या घटिया गुणवत्ता की खाद्य सामग्री सप्लाई करता पाया गया, तो उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अस्पतालों में भोजन की गुणवत्ता, खाद्य सामग्री की दरों और ठेका प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बीच स्थायी समिति ने प्रशासन से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया। मरीजों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने के लिए विशेष जांच टीम के गठन और ठेकेदारों की आपूर्ति व्यवस्था की जांच की मांग इस बैठक का प्रमुख मुद्दा रही।