मुंबई में प्रदूषण और पानी के संकट पर कांग्रेस का हमला, 8 करोड़ के टैंकर प्रस्ताव पर सवाल
मुंबई में प्रदूषण और पानी के संकट के बीच कांग्रेस ने 8 करोड़ के टैंकर प्रस्ताव, बीएमसी खर्च और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी पर सवाल उठाए।
मुंबई में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण और पानी की किल्लत के बीच सड़कों की धुलाई के लिए 8 करोड़ रुपये खर्च करने के बीएमसी के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने कड़ा विरोध जताया है। पार्टी ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है। ऐसे समय में सड़कों को पानी से धोने पर इतनी बड़ी राशि खर्च करना जनता के पैसों की बर्बादी है।
कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि दक्षिण मुंबई या वर्ली की कुछ सड़कों की धुलाई करने से पूरा शहर प्रदूषण मुक्त नहीं हो सकता। प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए दहिसर से लेकर मुलुंड तक पूरे मुंबई में एक समान और ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पार्टी ने इस बात पर भी जोर दिया कि शहर में प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई व्यापक स्तर पर होनी चाहिए।
बॉम्बे हाई कोर्ट की टिप्पणियों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने कहा कि मुंबई का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) लगातार खतरनाक स्तर पर बना हुआ है। पार्टी के अनुसार, शहर में चल रही 22 हजार से ज्यादा कंस्ट्रक्शन साइट्स, बिल्डर्स और रेडीमिक्स प्लांट से उड़ने वाली धूल प्रदूषण का प्रमुख कारण है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन इन गतिविधियों से फैलने वाले प्रदूषण पर लगाम लगाने में नाकाम रहा है।
पार्टी ने बीएमसी के खर्चों को लेकर भी सवाल उठाए। कांग्रेस ने नगरसेवकों को नए टैबलेट और लैपटॉप देने के प्रस्ताव का खुलकर विरोध करते हुए बीएमसी के पैसों के उचित इस्तेमाल की मांग की। पार्टी ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी नेताओं का बीएमसी प्रशासन पर कोई नियंत्रण नहीं है।
इस बीच, कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर कर करोड़ों मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। कांग्रेस ने इस कथित गड़बड़ी को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए नागरिकों के अधिकारों का सवाल उठाया।
पार्टी ने कहा कि देश में लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए नागरिकों को शांतिपूर्ण आंदोलन करने का पूरा अधिकार है। कांग्रेस के मुताबिक, यदि सरकार महात्मा गांधी के अहिंसक रास्ते पर चल रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश करती है, तो उसे इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
मुंबई में प्रदूषण नियंत्रण, पानी के संकट के बीच बीएमसी के खर्च और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस के इन सवालों ने राज्य सरकार और नगर निकाय प्रशासन की कार्यप्रणाली को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।