मुंबई में जलापूर्ति को लेकर बीएमसी के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। शहर में रोजाना आपूर्ति किए जाने वाले पानी का 34 फीसदी हिस्सा लीकेज और अनधिकृत कनेक्शनों के कारण बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर मुंबई की महापौर रितू तावड़े ने चिंता जताते हुए बीएमसी प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं।

महापौर रितू तावड़े ने अतिरिक्त महानगरपालिका आयुक्त अभिजीत बांगर को पत्र लिखकर इस मामले में तुरंत विस्तृत और व्यावहारिक रिपोर्ट पेश करने को कहा है। मुंबई को रोजाना करीब 4,600 मिलियन लीटर पानी की जरूरत होती है, जबकि झीलों से प्रतिदिन लगभग 4,800 मिलियन लीटर पानी उठाया जाता है। इसके बावजूद आम नागरिकों तक केवल 3,100 मिलियन लीटर पानी ही पहुंच पाता है।

बीएमसी की स्थायी समिति के सामने रखी गई रिपोर्ट में सामने आया कि शेष 34 फीसदी पानी का कोई सटीक हिसाब नहीं मिल पा रहा है। पानी की इतनी बड़ी मात्रा लीकेज और अनधिकृत कनेक्शनों के कारण बर्बाद होने की स्थिति ने जल प्रबंधन पर सवाल खड़े किए हैं।

महापौर ने कहा कि मुंबई को पानी देने वाले जलाशय इस समय भरे हुए हैं, लेकिन भविष्य में अल-नीनो और मौसम के बदलाव को देखते हुए अगले साल अगस्त तक पानी बचाकर रखना बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने कहा कि नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने के साथ-साथ वर्तमान में उपलब्ध पानी का सही प्रबंधन करना भी बहुत आवश्यक है।

महापौर ने बीएमसी प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 34 फीसदी बिना हिसाब वाले पानी में वास्तविक लीकेज, पानी चोरी और खराब मीटरों का अनुपात कितना है। इसके साथ ही उन्होंने अंडरग्राउंड लीकेज का पता लगाने के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और पानी चोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

जलाशयों में पर्याप्त पानी होने के बावजूद आपूर्ति किए जा रहे पानी का 34 फीसदी हिस्सा बिना सटीक हिसाब के रहना बीएमसी के जल प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती है। अब महापौर के निर्देश के बाद प्रशासन को लीकेज, चोरी और खराब मीटरों की स्थिति स्पष्ट करते हुए व्यावहारिक एक्शन प्लान पेश करना होगा।

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