मुंबई में पानी की किल्लत और जल कटौती के बीच टैंकरों से सड़कों की धुलाई कराने की बीएमसी की योजना को बड़ा झटका लगा है। शुक्रवार को हुई बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के सभी नगरसेवकों ने एकमत होकर इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। प्रशासन ने हवा में धूल और प्रदूषण कम करने के लिए टैंकरों से पानी लाकर सड़कें धोने की योजना बनाई थी, लेकिन पानी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए नगरसेवकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई।

मुंबई में पहले से ही आवासीय इलाकों में 10 फीसदी और व्यावसायिक क्षेत्रों में 20 फीसदी पानी की कटौती लागू है। ऐसे में टैंकरों के जरिए सड़कों की धुलाई पर खर्च करने की बीएमसी की योजना का विरोध हुआ। ठोस कचरा प्रबंधन विभाग की ओर से पेश प्रस्ताव में मानसून के अलावा साल के 150 दिनों तक विशेष जेटिंग टैंकर किराए पर लेकर सड़कों की सफाई करने की योजना शामिल थी। इस पूरी योजना के लिए करीब 8.25 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।

स्थायी समिति की बैठक में बीजेपी नेता गणेश खणकर ने प्रस्ताव को रद्द करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब पूरे शहर में पानी का संकट बना हुआ है, तब टैंकरों के पानी से सड़कें धोना बिल्कुल गलत है। विपक्षी और अन्य दलों के नगरसेवकों ने भी उनकी मांग का समर्थन किया और पानी के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन की योजना पर सवाल उठाए।

शिवसेना के अमेय घोले, कांग्रेस के अशरफ आजमी और मनसे के यशवंत किल्लेदार ने कहा कि जब राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति है, तब इस तरह पानी बर्बाद करना उचित नहीं है। उन्होंने बीएमसी को सड़कों की धुलाई पर ध्यान देने के बजाय पानी के सही वितरण को प्राथमिकता देने की सलाह दी।

स्थायी समिति के अध्यक्ष प्रभाकर शिंदे ने प्रस्ताव को ठंडे बस्ते में डालते हुए धूल प्रदूषण रोकने के लिए वैकल्पिक उपायों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि निर्माण कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए बिल्डरों की जिम्मेदारी भी तय की जानी चाहिए।

बीएमसी की इस योजना के खारिज होने से टैंकरों के जरिए सड़कों की धुलाई पर प्रस्तावित खर्च फिलहाल आगे नहीं बढ़ सका है। वहीं, स्थायी समिति में उठे सवालों ने पानी की कटौती के बीच उपलब्ध जल संसाधनों के इस्तेमाल और निर्माण कार्यों से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी पर ध्यान केंद्रित किया है।

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