मुंबई में इस साल गणेशोत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर मुंबईकरों और गणेश मंडलों की भागीदारी का असर विसर्जन व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। बीएमसी के आह्वान पर कुल विसर्जित गणेश मूर्तियों में से 97.27 प्रतिशत का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया गया। बीएमसी द्वारा शहर के अलग-अलग इलाकों में बनाए गए कृत्रिम तालाबों में 6 फीट तक की ऊंचाई वाली अधिकांश मूर्तियों का विसर्जन हुआ।

इस वर्ष मुंबई भर में कुल 1 लाख 97 हजार 382 गणेश मूर्तियों का विसर्जन किया गया। बीएमसी प्रशासन ने विसर्जन के लिए शहर के अलग-अलग इलाकों में 383 कृत्रिम तालाब बनाए थे। इनमें 6 फीट तक की ऊंचाई वाली 1 लाख 92 हजार 237 मूर्तियों का विसर्जन किया गया। इनमें 1 लाख 22 हजार से अधिक पीओपी और लगभग 70 हजार शाडू मिट्टी की मूर्तियां शामिल थीं।

वहीं, 6 फीट से अधिक ऊंचाई वाली 5 हजार 382 बड़ी मूर्तियों का विसर्जन समुद्र तटों और प्राकृतिक जल निकायों पर किया गया। नागरिकों के घरों के पास उद्यानों और खाली मैदानों में कृत्रिम तालाबों की सुविधा उपलब्ध कराए जाने से समुद्र तटों पर भीड़ काफी कम रही।

पर्यावरण-अनुकूल विसर्जन को बढ़ावा देने के लिए बीएमसी ने गणेशोत्सव से पहले मूर्तिकारों को 940 मीट्रिक टन से अधिक शाडू मिट्टी और 25 हजार लीटर से ज्यादा पर्यावरण-अनुकूल रंग मुफ्त वितरित किए थे। विसर्जन की व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारू बनाए रखने के लिए 25 हजार से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को तैनात किया गया था।

उच्च न्यायालय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नियमों का पालन करते हुए बीएमसी ने पूजा सामग्री और फूलों के लिए विशेष निर्माल्य कलश की भी व्यवस्था की थी। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जल स्रोतों को पूरी तरह सुरक्षित रखना था।

कृत्रिम तालाबों में हुए बड़े पैमाने पर विसर्जन और समुद्र तटों पर कम हुई भीड़ के बीच मुंबई की महापौर रितू तावड़े, उपमहापौर संजय घाडी और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े ने सभी गणेश भक्तों का आभार व्यक्त किया। इस वर्ष विसर्जन व्यवस्था में कृत्रिम तालाबों का व्यापक उपयोग पर्यावरण संरक्षण के लिए बीएमसी की व्यवस्था और मुंबईकरों के सहयोग को रेखांकित करता है।

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