गणेश मूर्तियों की बढ़ती ऊंचाई से हादसों का खतरा, भुलेश्वर घटना के बाद उठे गंभीर सवाल
मुंबई के भुलेश्वर में 22 फीट ऊंची गणेश मूर्ति गिरने से दो लोगों की मौत के बाद मूर्तियों की बढ़ती ऊंचाई पर सवाल उठे हैं। 2004 में तय 18 फीट की सीमा के बावजूद 40 फीट तक की मूर्तियां बन रही हैं।
मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान गणेश मंडलों के बीच मूर्तियों की बढ़ती ऊंचाई को लेकर होड़ अब हादसों का कारण बनने लगी है। शनिवार को भुलेश्वर के ‘भुलेश्वर राजा’ गणेश मंडल की आगमन यात्रा के दौरान 22 फीट ऊंची गणेश मूर्ति अचानक गिर गई। इस हादसे में मूर्ति के नीचे दबकर दो लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गणेश मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर सख्त नियम और अधिकतम सीमा तय करने की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है।
मुंबई के खेतवाड़ी, लालबाग और परेल जैसे इलाकों में गणेश मंडलों के बीच 20, 30 और 40 फीट तक ऊंची मूर्तियां स्थापित करने की प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। इतनी ऊंची मूर्तियों के आगमन और विसर्जन के दौरान हादसों का खतरा बना रहता है। इनके सुरक्षित आवागमन के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था और बड़ी संख्या में जनशक्ति की आवश्यकता होती है।
वर्ष 2004 में गणेशोत्सव समन्वय समिति ने गणेश मूर्तियों की अधिकतम ऊंचाई 18 फीट तय करने का फैसला लिया था। शुरुआती कुछ वर्षों तक इस नियम का पालन भी किया गया, लेकिन बाद में गणेश मंडलों ने इस सीमा को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। इसके बाद 22 फीट और धीरे-धीरे 30 से 40 फीट तक ऊंची मूर्तियां बनाई जाने लगीं।
भुलेश्वर की घटना पहली ऐसी घटना नहीं है, जिसमें ऊंची गणेश मूर्ति के कारण हादसा हुआ हो। इससे पहले अंधेरी, लालबाग और गिरगांव चौपाटी पर भी ऊंची मूर्तियों के कलंडने और गिरने की घटनाओं में कई लोग घायल हो चुके हैं।
गणेश भक्तों के बीच ऊंची मूर्तियों का आकर्षण और गणेश मंडलों के लिए इसके पीछे जुड़ा अर्थशास्त्र इस होड़ को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, भुलेश्वर हादसे के बाद मूर्तियों की बढ़ती ऊंचाई और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम एक बार फिर सामने आ गए हैं।
ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन और गणेशोत्सव समन्वय समिति के सामने अब मूर्तियों की ऊंचाई को लेकर ठोस और सख्त नीति लागू करने की जरूरत स्पष्ट रूप से सामने है। भुलेश्वर की घटना ने गणेशोत्सव के दौरान विशाल मूर्तियों के आगमन और विसर्जन से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।