ठाणे में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच पर वक्ता बच्चों को संबोधित करते हुए।   

मुंबई। अणुव्रत विश्व भारती सोसाइटी एवं अणुव्रत समिति, मुंबई क्षेत्र ठाणे के संयुक्त तत्वावधान में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत जीवन विज्ञान दिवस का आयोजन ई.एल.एस.एम.एच. हाई स्कूल, ठाणे (पश्चिम) में किया गया। कार्यक्रम में बच्चों को स्वस्थ जीवन, शांत मन और बेहतर व्यवहार के लिए जीवन विज्ञान के महत्व से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति, क्षेत्र ठाणे के पदाधिकारियों द्वारा अणुव्रत गीत के संगान से हुआ। क्षेत्र ठाणे के संयोजक भंवर दास वैष्णव जैन ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए बच्चों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सुबह जल्दी उठना, व्यायाम करना, बड़ों का सम्मान करना और क्रोध पर नियंत्रण रखना ही सच्चा जीवन विज्ञान है।

ई.एल.एस.एम.एच. स्कूल के सुनील भास्कर पाटिल ने बच्चों को जीवन विज्ञान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और प्रेक्षाध्यान का अभ्यास करवाया।

अणुव्रत समिति, ऐरोली के संयोजक विनोद मेहता ने मराठी भाषा में बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि नशा हिम्मत का होना चाहिए, नशा परिवार को तोड़ने का नहीं, बल्कि जोड़कर रखने का होना चाहिए। नशा गद्दारी का नहीं, श्रेष्ठ बनने का होना चाहिए।

अणुव्रत समिति, मुंबई के अध्यक्ष रमेश सोनी ने कहा कि जीवन विज्ञान का अर्थ जीने की कला का विज्ञान है। यह हमें सिखाता है कि कैसे स्वस्थ रहें और मन को शांत रखें। वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोहर कच्छारा ने बच्चों को अणुव्रत के 11 नियमों की जानकारी दी।

जोन प्रभारी विमला हिरण ने कहा कि जीवन विज्ञान के तीन मुख्य स्तंभ स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन और स्वस्थ भाव हैं। प्रिया मुथा ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन विज्ञान कोई विषय नहीं, बल्कि जीने की कला है।

इस अवसर पर विशेष रूप से रमेश सोनी, मनोहर कच्छारा, भंवरदास वैष्णव जैन, विनोद मेहता, विमला हिरण, प्रिया मुथा, राकेश मुथा, प्रतिक्षा नासरे, रश्मि कुलकर्णी, हर्षा पाने और प्रियंका तलेकर उपस्थित रहे। समस्त कार्यक्रम अणुव्रत समिति, मुंबई-क्षेत्र ठाणे के कार्यकर्ताओं के सहयोग से सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।

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