मुंबई: महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह आयोजित
शासनश्री साध्वी कंचन प्रभा और मंजूरेखा ने जीवन विज्ञान को तनाव मुक्ति, आत्म-नियंत्रण और सहिष्णुता का माध्यम बताया।
तस्वीर में मुंबई के कार्यक्रम के दौरान साध्वीवृंद और अन्य अतिथि हॉल में उपस्थित हैं।
मुंबई। महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल में अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के दौरान शासनश्री साध्वी कंचन प्रभा और शासनश्री साध्वी मंजूरेखा के सान्निध्य में कार्यक्रम आयोजित हुआ। शासनश्री साध्वी कंचन प्रभा ने कहा कि “जीवन विज्ञान” प्राणीमात्र को जीवन जीने की कला के साथ चिंतन और व्यवहार सिखाता है। यह एक प्रायोगिक शिक्षण है। इसके प्रयोग करने से कई बीमारियों का समाधान हो जाता है। जीवन विज्ञान स्व-ज्ञान से तुलन है, जिससे एक पवित्र आभामंडल बनता है। प्रयोग करते-करते अभ्यास और आत्मा नियंत्रित हो जाते हैं।
शासनश्री साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि जीवन विज्ञान भीतर झाँकने का उपकरण है। भीतर की साधना व्यक्ति को रूपांतरण बनाती है और सहिष्णु बनाती है। आज जो कुछ हो रहा है, वह सहन नहीं करने की कमजोरी से ही हो रहा है। वर्तमान माहौल में परिवार, समाज और राष्ट्र सभी चिंतित हैं कि कल क्या होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
कार्यक्रम में अध्यक्ष गणपत डांगलिया, अणुव्रत समिति के संयोजक भाई नरेंद्र मुनोत और अणुव्रत समिति प्रभारी दिनेश धाकड़ ने विचार व्यक्त किए। साध्वी वृंद ने मधुर गीत प्रस्तुत किया। साध्वीश्री चेलना जी ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का संयोजन साध्वी मंजूरेखा ने किया।
अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का शुभारंभ अणुव्रत महासंगान से हुआ और अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह का समापन भी अणुव्रत महासंगान से हुआ। कार्यक्रम में जीवन विज्ञान को तनाव मुक्ति, आत्म-नियंत्रण और सहिष्णुता से जोड़ते हुए उसके प्रयोगात्मक महत्व को रेखांकित किया गया।