तस्वीर में तिलक स्कूल परिसर में स्काउट कैडेट्स, शिक्षक और छात्र कतार में खड़े हैं।   

मुंबई। अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतर्गत जीवन विज्ञान दिवस का आयोजन अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के तत्वावधान में अणुव्रत समिति, मुंबई क्षेत्र डोंबिवली द्वारा तिलक स्कूल, डोंबिवली में किया गया। कार्यक्रम में कक्षा 5वीं के लगभग 80 विद्यार्थियों एवं स्काउट के बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति की बहनों द्वारा जीवन विज्ञान गीत के सामूहिक गायन से हुआ। मुख्य वक्ता, उपासिका एवं ज्ञानशाला प्रशिक्षिका किरण कोठारी ने खेल एवं रोचक उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन विज्ञान का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि जीवन विज्ञान व्यक्ति को अपने मन एवं भावनाओं को समझने, क्रोध पर नियंत्रण रखने, एकाग्रता बढ़ाने तथा जीवन को सकारात्मक दृष्टिकोण से जीने की कला सिखाता है।

किरण कोठारी ने विद्यार्थियों को समझाया कि हमने क्या सोचा, क्या कहा और क्या किया, इन सभी का प्रभाव हमारे व्यक्तित्व पर पड़ता है। प्रतिक्रिया के स्थान पर सकारात्मक उत्तर देने की आदत विकसित करने से व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि जीवन में नकारात्मकता कम करने और सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए अपनी सोच एवं व्यवहार में बदलाव करना आवश्यक है। विभिन्न उदाहरणों एवं खेलों के माध्यम से बच्चों ने जीवन विज्ञान के महत्वपूर्ण पहलुओं को सरलता से समझा।

द्वितीय सत्र प्रशिक्षिका लता हीरावत ने लिया। उन्होंने विद्यार्थियों को पाँच योगिक क्रियाओं का अभ्यास करवाया तथा मस्तिष्क, आंख, कान एवं गर्दन आदि से संबंधित प्रयोग करवाए। इसके साथ ही महाप्राण ध्वनि, ज्ञान केंद्र एवं स्मृति विकास के प्रयोग कराते हुए उनके लाभों की जानकारी दी।

विद्यार्थियों से जीवन में सकारात्मक लक्ष्य प्राप्त करने के लिए संकल्प भी करवाया गया। लता हीरावत ने बताया कि नियमित रूप से अपने संकल्प का पालन करने से व्यक्ति अपने निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ सकता है।

कार्यक्रम में क्षेत्र संयोजिका रीना कोठारी, सहसंयोजिका रश्मि बडाला एवं सीमा इटोदिया, सदस्य शिल्पा कोठारी सहित अणुव्रत समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। विद्यालय की ओर से पाटिल सर, प्राचार्य सर एवं योग मोरे सर ने अपने विचार व्यक्त किए और जीवन विज्ञान कार्यशाला से विद्यार्थियों को होने वाले लाभों की सराहना की।

कार्यशाला के बाद एक विद्यार्थी ने अपना अनुभव साझा किया। विद्यार्थी ने बताया कि उसे कार्यक्रम से क्या सीख मिली और जीवन विज्ञान के अभ्यासों से उसे किस प्रकार लाभ मिला।

इस प्रकार अणुव्रत उद्बोधन सप्ताह के अंतिम जीवन विज्ञान दिवस का आयोजन विद्यार्थियों में सकारात्मक सोच, एकाग्रता एवं जीवन-मूल्यों के विकास का संदेश देते हुए सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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