बीएमसी में नई इनोवा क्रिस्टा खरीद की तैयारी पर विवाद, छह माह पहले खरीदी स्कॉर्पियो पर विपक्ष का फिजूलखर्ची का आरोप

मुंबई महानगरपालिका में छह महीने पहले खरीदी गई स्कॉर्पियो गाड़ियों के बावजूद पदाधिकारियों के लिए नई इनोवा क्रिस्टा खरीदने की तैयारी विवादों में है। विपक्ष ने इसे जनता के टैक्स के पैसों की फिजूलखर्ची बताते हुए श्वेतपत्र जारी करने और पूरे खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।

Update: 2026-07-30 05:52 GMT

मुंबई महानगरपालिका में जनता के टैक्स के पैसों के इस्तेमाल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। बीएमसी प्रशासन विभिन्न पदाधिकारियों और समिति अध्यक्षों के लिए महंगी और लग्जरी इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां खरीदने की तैयारी कर रहा है। खास बात यह है कि महज छह महीने पहले ही पालिका प्रशासन ने इन पदाधिकारियों के लिए नई स्कॉर्पियो गाड़ियां खरीदी थीं। अब उन गाड़ियों को पर्याप्त आरामदायक नहीं बताते हुए नई लग्जरी गाड़ियां खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस फैसले को लेकर विपक्ष ने सार्वजनिक धन की बर्बादी और फिजूलखर्ची का आरोप लगाया है।

प्रशासन द्वारा तैयार किए जा रहे प्रस्ताव के अनुसार, सदन के नेता, विरोधी पक्ष नेता, उपमहापौर और तीनों प्रमुख वैधानिक समितियों के अध्यक्षों के लिए इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां खरीदे जाने का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव को जल्द ही अंतिम मंजूरी के लिए पालिका आयुक्त अश्विनी भिडे के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव की जानकारी सामने आते ही राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई और विपक्षी दलों ने प्रशासन के साथ-साथ सत्ता पक्ष को भी निशाने पर लिया।

पूर्व महापौर और शिवसेना (यूबीटी) नेता किशोरी पेडणेकर ने इस निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हुए सवाल उठाया कि जनवरी में ही जब 54 नई गाड़ियां खरीदी गई थीं, तो इतनी जल्दी नई गाड़ियों की आवश्यकता कैसे उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि ये गाड़ियां पांच वर्ष के कार्यकाल को ध्यान में रखकर खरीदी गई थीं, इसलिए उनका उपयोग जारी रहना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'गाड़ी आरामदायक नहीं है' या 'पीठ में दर्द होता है' जैसे बहाने बनाकर संबंधित कंपनी का नाम खराब किया जा रहा है और पालिका के खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

किशोरी पेडणेकर ने तंज कसते हुए कहा कि क्या पालिका आयुक्त सिर्फ पदाधिकारियों के लाड़-प्यार पूरे करने के लिए बैठे हैं। उन्होंने यह मुद्दा भी उठाया कि जहां चुने हुए जनप्रतिनिधियों को 25 हजार रुपये का मानधन मिलता है, वहीं महापौर के निजी सहायक को 50 हजार रुपये दिए जा रहे हैं।

कांग्रेस नेता अशरफ आजमी ने भी इस प्रस्ताव की आलोचना करते हुए कहा कि बीएमसी एक ओर बचत और वित्तीय अनुशासन के बड़े-बड़े दावे करती है, जबकि दूसरी ओर जनता की गाढ़ी कमाई इस तरह खर्च की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निगम के सभी खर्चों पर श्वेतपत्र जारी किया जाना चाहिए।

बीएमसी प्रशासन की नई लग्जरी गाड़ियां खरीदने की तैयारी को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय से पहले विपक्ष ने सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग तेज कर दी है।

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