बीएमसी स्कूलों के मिड-डे मील पर गंभीर सवाल, खिचड़ी में कांच मिलने के बाद जांच की उठी मांग

मुंबई के बीएमसी स्कूल में खिचड़ी में कांच का टुकड़ा मिलने के बाद मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल उठे। किशोरी पेडणेकर ने प्रयोगशाला जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।

Update: 2026-07-31 13:14 GMT

मुंबई महानगरपालिका द्वारा संचालित प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घाटकोपर (पूर्व) स्थित पंतनगर बीएमसी स्कूल नंबर 3 में छात्रों को परोसी गई खिचड़ी में कांच का टुकड़ा मिलने की घटना के बाद बीएमसी की विरोधी पक्ष नेता किशोरी पेडणेकर ने पूरे मामले की खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियमों के अनुसार गहन जांच कराने की मांग की है।

किशोरी पेडणेकर ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिडे और राज्य के एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे को औपचारिक पत्र सौंपकर मामले में तत्काल सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को परोसे जा रहे भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए ताकि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता न हो।

उन्होंने बताया कि बीएमसी के कई स्कूलों के अचानक किए गए निरीक्षण के दौरान बच्चों को दिया जा रहा भोजन बेहद घटिया और निम्न स्तर का पाया गया। उनके अनुसार, भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर बच्चों के अभिभावकों की ओर से भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 30 जुलाई 2026 को घाटकोपर (पूर्व) स्थित पंतनगर बीएमसी स्कूल नंबर 3 में छात्रों को दी गई खिचड़ी के अंदर कांच का एक टुकड़ा मिला। इस घटना ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य और उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।

विरोधी पक्ष नेता ने कहा कि मासूम बच्चों को परोसा जाने वाला भोजन पूरी तरह सुरक्षित, पौष्टिक और खाने योग्य होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बीएमसी के सभी स्कूलों में सप्लाई किए जा रहे मिड-डे मील के नमूने लेकर उन्हें मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाए और जांच की विस्तृत रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले ठेकेदारों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ तत्काल सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी मासूम बच्चे की जान जोखिम में न पड़े। खिचड़ी में कांच मिलने की घटना के बाद बीएमसी स्कूलों में परोसे जा रहे मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर जवाबदेही तथा निगरानी का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।

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