तस्वीर में कूपर अस्पताल के सम्मेलन कक्ष में समीक्षा बैठक करते बीएमसी अधिकारी और डॉक्टर।

मुंबई के कूपर और एचबीटी ट्रॉमा केयर अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए बीएमसी ने समीक्षा बैठक की। शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को बृहन्मुंबई महानगरपालिका की स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष हरीश भांदिर्गे ने जुहू स्थित डॉ. आर. एन. कूपर जनरल अस्पताल और एचबीटी ट्रॉमा केयर अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने दोनों अस्पतालों के वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक कर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया और डॉक्टरों की समस्याएं विस्तार से सुनीं।

बैठक में डॉक्टरों ने अस्पतालों के कामकाज से जुड़ी परेशानियों और सुधार के लिए अपने सुझाव रखे। हरीश भांदिर्गे ने सभी की बातें गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि डॉक्टरों की समस्याओं का जल्द से जल्द समाधान किया जाएगा। बैठक में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के साथ अस्पतालों की व्यवस्थाओं को मजबूत करने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।

कैंसर रोगियों के लिए कीमोथेरेपी की सुविधा बढ़ाने, किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस बेड की संख्या में इजाफा करने और नवजात बच्चों की गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) के लिए चल रही टेंडर प्रक्रिया को तेजी से पूरा करने पर विशेष रूप से विचार किया गया। महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एचपीवी टीकाकरण अभियान को अधिक प्रभावी तरीके से संचालित करने पर भी जोर दिया गया।

अस्पतालों में स्टाफ नर्सों की कमी दूर करने के साथ कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता और साफ-सफाई सुधारने के निर्देश दिए गए। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को आसान बनाने तथा विकलांगता प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आने वाली अड़चनों को दूर करने पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा, मरीजों और उनके परिजनों के साथ बेहतर संवाद सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल स्टाफ के वास्ते विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने की बात कही गई।

इस दौरे और समीक्षा बैठक में स्थानीय नगरसेवक, बीएमसी के चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. शैलेश मोहिते और कूपर अस्पताल की डीन डॉ. छाया शिंदे सहित कई प्रमुख अधिकारी और डॉक्टर मौजूद रहे। बैठक में उठाए गए मुद्दों और समस्याओं के शीघ्र समाधान के आश्वासन के साथ अस्पतालों में उपचार सुविधाओं, चिकित्सा सेवाओं और मरीजों को मिलने वाली सहायता में सुधार पर ध्यान केंद्रित किया गया।

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