मुंबई में अवैध और अनधिकृत निर्माणों का जाल लगातार फैल रहा है, लेकिन इनके खिलाफ बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कार्रवाई के आंकड़े प्रशासनिक सुस्ती की गंभीर तस्वीर पेश कर रहे हैं। पिछले 10 वर्षों में अवैध निर्माणों को लेकर बीएमसी की ऑनलाइन शिकायत प्रणाली पर 2,14,917 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन इनमें से महज 13,211 मामलों में ही अवैध निर्माणों को गिराने की कार्रवाई की गई। यानी कुल शिकायतों के मुकाबले केवल 6.15 प्रतिशत मामलों में ही बीएमसी का बुलडोजर चला।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत सामने आई जानकारी के अनुसार, दर्ज कुल 2,14,917 शिकायतों में से बीएमसी ने 1,16,228 शिकायतों को 'डुप्लिकेट' करार दिया। इसके बाद वास्तविक शिकायतों की संख्या 98,689 बताई गई। सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि हजारों शिकायतों के बावजूद अनधिकृत निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई बेहद सीमित रही। आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख की ओर से मांगी गई जानकारी के आधार पर तैयार रिपोर्ट ने बीएमसी की शिकायत निवारण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, बीएमसी ने अवैध निर्माणों के संबंध में 57 हजार से अधिक नोटिस जारी किए और 31 हजार से ज्यादा कारण बताओ आदेश दिए। इसके बावजूद प्रत्यक्ष तोड़क कार्रवाई का आंकड़ा केवल 13,211 तक ही पहुंच सका। नोटिस और कारण बताओ आदेश जारी होने के बाद भी बड़ी संख्या में शिकायतों का नतीजा निर्माणों को गिराने की कार्रवाई के रूप में सामने नहीं आया।

वॉर्डवार आंकड़ों में भी कार्रवाई की सुस्ती स्पष्ट दिखाई देती है। एल वॉर्ड (कुर्ला) में सबसे अधिक 30,935 शिकायतें दर्ज की गईं, लेकिन केवल 637 मामलों में कार्रवाई हुई। इसी तरह एम ईस्ट (मानखुर्द) वॉर्ड में 14,510 शिकायतों के बावजूद महज 159 मामलों में ही अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाया गया। शिकायतों की बड़ी संख्या और ध्वस्तीकरण की बेहद कम कार्रवाई के बीच का अंतर बीएमसी की जमीनी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

अनधिकृत निर्माणों के कारण मुंबई पहले भी कई गंभीर हादसों का सामना कर चुकी है। कमला मिल, भानू फरसाण मार्ट और घाटकोपर इमारत हादसे जैसे मामलों में दर्जनों बेकसूर नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन हादसों के बावजूद अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के आंकड़े अपेक्षित प्रभावशीलता नहीं दर्शाते।

आरटीआई कार्यकर्ता शकील अहमद शेख का दावा है कि बीएमसी हर साल अतिक्रमण विरोधी अभियानों पर लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद हजारों शिकायतें लंबित हैं और अनधिकृत निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है।

इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री और बीएमसी कमिश्नर श्रीमती अश्विनी भिड़े से शिकायत की गई है। शिकायत में दोषियों और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही लंबित अवैध निर्माणों को तत्काल हटाने की मांग की गई है। अब सवाल यह है कि लाखों शिकायतों, हजारों नोटिसों और करोड़ों रुपये के खर्च के बावजूद अनधिकृत निर्माणों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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