मुंबई: बीएमसी पर अदालती आदेशों में दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप
बोरिवली में डिपो की जमीन से 24 घंटे में अतिक्रमण हटाया गया, लेकिन हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद दीया मिर्जा का वीडियो पुनः अपलोड न होने पर बीएमसी घिरी।
मुंबई। अदालती आदेशों के पालन को लेकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। प्रशासन पर अदालतों के निर्देशों को लागू करने में दोहरा मापदंड अपनाने के आरोप लग रहे हैं। एक ओर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद महज 24 घंटे में बोरिवली स्थित बेस्ट बस डिपो की जमीन से 27 दुकानों पर बुलडोजर चला दिया गया, वहीं दूसरी ओर बॉम्बे हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अभिनेत्री दीया मिर्जा का प्रदूषण रोधी जागरूकता वीडियो अब तक बीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर दोबारा अपलोड नहीं किया गया है।
बोरिवली पूर्व में अतिक्रमण नहीं हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 3 नवंबर 2026 को बीएमसी आयुक्त श्रीमती अश्विनी भिड़े को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अदालत ने उनका वेतन रोकने के साथ 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद बीएमसी प्रशासन हरकत में आया और 4 नवंबर को ही बेस्ट बस डिपो की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करते हुए 3,400 वर्ग मीटर जमीन खाली करा ली। कार्रवाई के बाद अदालत ने आयुक्त के वेतन पर लगाई गई रोक हटा दी।
इसके उलट अभिनेत्री दीया मिर्जा से जुड़े मामले में बीएमसी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। दिवाली के दौरान पटाखों से होने वाले प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता संदेश देने वाला दीया मिर्जा का वीडियो बीजेपी नेताओं के विरोध के बाद बीएमसी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से हटा दिया था। इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए पर्यावरण के मुद्दे को राजनीतिक रंग नहीं देने और वीडियो को तत्काल दोबारा अपलोड करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद वीडियो अब तक वापस अपलोड नहीं किया गया है।
एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के वेतन रोकने और जुर्माना लगाने के निर्देश के बाद बीएमसी ने महज एक दिन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई पूरी कर ली, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बाद भी दीया मिर्जा के वीडियो को लेकर प्रशासन की ओर से केवल अध्ययन करने की बात कहकर देरी की जा रही है। दोनों मामलों में बीएमसी के अलग-अलग रवैये ने उसकी निष्पक्षता और अदालती आदेशों के प्रति जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुंबई के नागरिकों और कानून विशेषज्ञों के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या बीएमसी प्रशासन सभी अदालतों के आदेशों को समान गंभीरता से लागू नहीं करता? क्या हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन कराने के लिए भी प्रशासन को अवमानना (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) की कार्रवाई का इंतजार है? सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 24 घंटे में हुई कार्रवाई और हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद लंबित वीडियो का मामला बीएमसी की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर बहस का विषय बन गया है।