मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में मिठी नदी गाद सफाई घोटाले से जुड़ी विवादास्पद कंपनी को दोबारा ठेका दिए जाने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। बीएमसी में कांग्रेस के गट नेता अशरफ आजमी ने इस फैसले पर प्रशासन और बीजेपी की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले जिस कंपनी पर घोटाले में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे, उसी को अब दोबारा काम सौंप दिया गया है।

अशरफ आजमी ने बताया कि भांडुप में एक निरीक्षण केंद्र से जुड़े 35 करोड़ रुपये के काम का टेंडर केवल 28 करोड़ रुपये में 'वर्गो स्पेशैलिटी' नामक कंपनी को दिया गया है। उनके अनुसार, इस कंपनी के डायरेक्टर जय जोशी हैं, जिनका नाम पहले मिठी नदी गाद सफाई घोटाले में प्रमुखता से सामने आया था। उनके पास कचरा हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली विशेष 'शील्ड कूलर मशीन' भी थी।

कांग्रेस नेता ने बीजेपी की कथित दोहरी नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस कंपनी और उसके डायरेक्टर पर पहले बीजेपी नेताओं ने ही घोटाले में शामिल होने के गंभीर आरोप लगाए थे, जिसकी आर्थिक अपराध शाखा जांच कर रही थी और जिसे ब्लैकलिस्ट किया गया था, उसे दोबारा ठेका कैसे दे दिया गया?

आजमी ने बीएमसी सदन में सवाल उठाया कि क्या बीजेपी अब जय जोशी को निर्दोष मान चुकी है या पहले पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे को बदनाम करने के लिए ये सभी आरोप लगाए गए थे?

इस मुद्दे पर बीएमसी की बैठक में कांग्रेस और बीजेपी के नगरसेवकों के बीच तीखी बहस हुई। दोनों पक्षों के बीच तू-तू, मैं-मैं की स्थिति भी देखने को मिली। कांग्रेस नेता ने चेयरमैन और बीएमसी प्रशासन से विवादित कंपनी को ठेका दिए जाने के फैसले पर स्पष्ट जवाब मांगा। हालांकि, प्रशासन की ओर से कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला और इसके बावजूद प्रस्ताव पारित कर दिया गया।

अशरफ आजमी ने कहा कि जब सत्ताधारी दल अपनी ही पुरानी बातों से पलटकर आरोपों से घिरी कंपनी को दोबारा काम सौंप रहा है, तो इससे उसके पहले लगाए गए आरोपों की सत्यता पर सवाल खड़े होते हैं। इस फैसले के बाद बीएमसी के ठेकों की प्रक्रिया और उनमें पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर गहरा गया है।

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