मुंबई में क्षेत्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षिका सेमिनार का शुभारंभ, संपर्क पखवाड़े के साथ संस्कारों पर जोर

ज्ञानशाला प्रशिक्षण एवं संपर्क पखवाड़े के शुभारंभ पर मुंबई के चेम्बूर में आयोजित क्षेत्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षिका सेमिनार में साध्वी निर्वाणश्री और साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने आध्यात्मिक शिक्षा, संस्कार और बच्चों के समग्र व्यक्तित्व विकास में प्रशिक्षिकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

Update: 2026-07-27 07:54 GMT

तस्वीर में मुंबई के चेम्बूर में आयोजित क्षेत्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षिका सेमिनार एवं संपर्क पखवाड़े के दौरान साध्वी निर्वाणश्री और अन्य संभागियों का समूह नजर आ रहा है।

मुंबई के चेम्बूर में क्षेत्रीय ज्ञानशाला प्रशिक्षिका सेमिनार एवं ज्ञानशाला संपर्क पखवाड़ा का शुभारंभ साध्वी निर्वाणश्री के सान्निध्य में हुआ। आयोजित सेमिनार में बड़ी संख्या में प्रशिक्षिकाओं ने भाग लिया और ज्ञानशाला गतिविधियों को प्रभावी बनाने के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए।

संभागियों को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान हमारी चेतना को विशुद्ध करता है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को बचपन से ही इन संस्कारों में ढाला जाए तो उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास की पूरी संभावना रहती है। उन्होंने प्रशिक्षिकाओं के कार्य की सराहना करते हुए कहा कि वे साधुवाद की पात्र हैं।

साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने संबोधन में कहा कि प्रशिक्षिकाएं स्वयं को केवल अध्यापन तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि उन पर संस्कार दान की भी महती ज़िम्मेवारी है।

कार्यक्रम में मुंबई सभाध्यक्ष सुरेन्द्र कोठारी, महासभा के आंचलिक प्रभारी दिनेश सुतरिया, रिंकु बाफना, आंचलिक संयोजिका राजश्री कच्छारा, सहसंयोजिका अंजू चौधरी, तेजराज बंबोली तथा प्रेमलता सिसोदिया ने अपने विचार व्यक्त किए।

इस अवसर पर साध्वी योगक्षेमप्रभा, साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितप्रभा एवं साध्वी मधुरप्रभा ने गीत के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन तारा आच्छा ने किया, जबकि आभार शुचिता जैन ने व्यक्त किया। ज्ञानशाला प्रशिक्षण एवं संपर्क पखवाड़े के शुभारंभ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसमें आध्यात्मिक शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर विशेष बल दिया गया।

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