गोरेगांव-मूलुंड लिंक रोड पर बड़ी सफलता, पहली टीबीएम तैयार, जल्द शुरू होगी सुरंग खुदाई
गोरेगांव-मूलुंड लिंक रोड परियोजना में पहली टीबीएम मशीन तैयार, जल्द शुरू होगी जुड़वां सुरंगों की खुदाई, जानें पूरी जानकारी।
तस्वीर में गोरेगांव-मूलुंड लिंक रोड परियोजना के तहत लॉन्च शाफ्ट पर स्थापित टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) और उसका कंट्रोल रूम दिखाई दे रहा है।
मुंबई में ट्रैफिक की समस्या को कम करने और पूर्व-पश्चिम उपनगरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने वाली बृहन्मुंबई महानगरपालिका की महत्वाकांक्षी गोरेगांव-मूलुंड लिंक रोड परियोजना ने एक अहम उपलब्धि हासिल की है। परियोजना के तहत बनने वाली जुड़वां सुरंगों में से एक की खुदाई के लिए विशालकाय टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) को तैयार कर लिया गया है।
बीएमसी ने इस टीबीएम मशीन की असेंबली यानी उसके सभी पुर्जों को जोड़ने का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। मशीन को दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी क्षेत्र में बनाए गए लॉन्च शाफ्ट पर तैनात और स्थापित किया गया है। मशीन के पूरी तरह असेंबल होने के बाद इसका महत्वपूर्ण साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट भी सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
इस परीक्षण के दौरान टीबीएम मशीन की सभी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, हाइड्रोलिक, कंट्रोल और सुरक्षा प्रणालियों की बारीकी से जांच की गई, ताकि सुरंग निर्माण के दौरान किसी भी तरह की तकनीकी समस्या सामने न आए। टेस्ट के दौरान मशीन के सभी सिस्टम निर्धारित मानकों के अनुसार सही पाए गए हैं।
अब मशीन के कुछ अंतिम तकनीकी निरीक्षण और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान के नीचे सुरंग बनाने के लिए वास्तविक खुदाई का काम आधिकारिक रूप से शुरू किया जाएगा।
गोरेगांव-मूलुंड लिंक रोड परियोजना मुंबईकरों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस परियोजना के तहत बनने वाली सुरंग गोरेगांव और मूलुंड के बीच आवागमन को आसान बनाने के साथ-साथ वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे और ईस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे को जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगी। इससे रोजाना होने वाली ट्रैफिक समस्या को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
बीएमसी प्रशासन के अनुसार, परियोजना को अत्याधुनिक तकनीक और पर्यावरण सुरक्षा के उच्च मानकों का पालन करते हुए आगे बढ़ाया जा रहा है। टीबीएम मशीन का तैयार होना इस परियोजना में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, जिससे मुंबई में आधुनिक भूमिगत सड़क नेटवर्क के निर्माण की दिशा में काम तेजी से आगे बढ़ेगा।