मुंबई के घाटकोपर (पश्चिम) स्थित ऐतिहासिक खंडोबा डोंगर क्षेत्र की सूरत बदलने की तैयारी है। यहां रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने लगभग 5.71 करोड़ रुपये की विकास परियोजना तैयार की है। इस योजना के तहत मजबूत सड़कें, जल निकासी व्यवस्था और पहाड़ी ढलानों पर सुरक्षा संबंधी कार्य किए जाएंगे, ताकि स्थानीय निवासियों को राहत मिल सके और बारिश के दौरान होने वाले हादसों के जोखिम को कम किया जा सके।

बीएमसी के 'एन' वार्ड की ओर से तैयार की गई इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य खंडोबा डोंगर क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना है। पहाड़ी इलाके में रहने वाले नागरिकों को बेहतर आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही बारिश के मौसम में मिट्टी खिसकने और अन्य संभावित हादसों से सुरक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया गया है।

इस विकास योजना के तहत खंडोबा डोंगर परिसर में सीमेंट कंक्रीट की मजबूत सड़कें बनाई जाएंगी। इससे क्षेत्र में लोगों की आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। इसके अलावा, बारिश के पानी की उचित निकासी सुनिश्चित करने के लिए नए नालों का निर्माण किया जाएगा। पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी खिसकने से रोकने के लिए मजबूत सुरक्षा दीवारें बनाई जाएंगी और सुरक्षा जालियां भी लगाई जाएंगी।

परियोजना के लिए बीएमसी ने ई-निविदा प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसमें मेसर्स एस. के. महालिंगम कंस्ट्रक्शन कंपनी का चयन किया गया है। कंपनी ने महानगरपालिका के अनुमानित खर्च से 3.33 प्रतिशत कम दर पर निविदा दाखिल की थी। इसी आधार पर उसकी बोली को सबसे उपयुक्त माना गया है।

अब इस ठेके को अंतिम स्वीकृति देने का प्रस्ताव बीएमसी की स्थायी समिति के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। स्थायी समिति की मंजूरी मिलने के बाद ठेकेदार को काम शुरू करने के आदेश जारी किए जाएंगे। परियोजना के लिए मानसून की अवधि को भी ध्यान में रखा गया है और पूरे काम को छह महीनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बीएमसी की इस परियोजना से खंडोबा डोंगर परिसर में सड़कों, जल निकासी और सुरक्षा संबंधी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है। लंबे समय से इन सुविधाओं की कमी का सामना कर रहे स्थानीय निवासियों के लिए यह विकास कार्य महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में आवागमन और बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था मजबूत करने के साथ पहाड़ी ढलानों की सुरक्षा को भी बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

Tags: