डोंबिवली तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व का आगाज, अर्जुन मेड़तवाल ने बताया आत्मदर्शन का महत्व
डोंबिवली तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस ‘खाद्य संयम दिवस’ मनाया गया। उपासक अर्जुन मेड़तवाल और गेहरीलाल बाफना ने आहार संयम, स्वास्थ्य, त्याग और आत्मदर्शन का महत्व समझाया।
डोंबिवली के तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व के दौरान हॉल में बैठे श्रद्धालु।
मुंबई। डोंबिवली स्थित तेरापंथ भवन में पर्युषण पर्व का प्रथम दिवस ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में मनाया गया। आचार्य महाश्रमण की आज्ञा से सूरत से समागत उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में विशाल श्रावक समुदाय ने सहभागिता की।
इस अवसर पर प्रवक्ता उपासक अर्जुन मेड़तवाल ने कहा कि भारत पर्व प्रधान देश है, जहां विविध धर्मों के अनुयायी रहते हैं और सभी धर्मों के अपने-अपने पर्व हैं। होली, दीपावली, मकर संक्रांति, गणेश चतुर्थी और जन्माष्टमी जैसे पर्वों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जैनों का प्रमुख पर्व पर्युषण है। पर्युषण को ‘पर्वाधिराज’ का विशेषण प्राप्त है, क्योंकि अन्य पर्वों में मनोरंजन की बात होती है, जबकि पर्युषण पर्व में मनोरंजन के स्थान पर आत्मरंजन पर जोर दिया जाता है। इसमें त्याग और तपस्या की साधना होती है। पर्युषण में परदर्शन नहीं, बल्कि आत्मदर्शन होता है।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय निर्देशानुसार पर्युषण का प्रथम दिवस ‘खाद्य संयम दिवस’ के रूप में मनाया जाता है। साधना के क्षेत्र में खाद्य संयम का बहुत बड़ा महत्व है। जहां आहार का संयम होता है, वहां सुस्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। धर्म की साधना भी तभी अच्छी तरह से हो सकती है, जब शरीर स्वस्थ हो। उन्होंने भोजन के नियमों को भली-भांति समझने और उनका सम्यक् पालन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि ‘प्रथम सुख निरोगी काया’ की कहावत भी प्रचलित है। तन और मन दोनों की स्वस्थता के लिए हिताहार, मिताहार और ऋताहार पर ध्यान देना चाहिए।
सहयोगी उपासक गेहरीलाल बाफना ने वर्तमान समय में फास्ट फूड और जंक फूड के बढ़ते प्रचलन पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चे भी रोटी-सब्जी या दाल-चावल का भोजन पसंद नहीं करते और उन्हें चटपटा भोजन अधिक पसंद आता है। उन्होंने बाजार के भोजन को सात्विक नहीं बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को अस्वस्थ बना रहा है। उन्होंने भोजन में विवेक रखने और दूषित भोजन से बचने की सलाह दी।
गेहरीलाल बाफना ने अनशन और ऊणोदरी करने तथा सीमित पदार्थों को ही भोजन में स्थान देने की बात कही। उन्होंने मैदा, शक्कर और नमक इन तीन चीजों को ‘व्हाइट प्वाइजन’ बताते हुए शरीर के लिए अत्यंत हानिकारक बताया और इनके कम से कम उपयोग की सलाह दी।
कार्यक्रम में सभा अध्यक्ष डॉ. मदन कोठारी ने स्वागत वक्तव्य दिया तथा उपासक द्वय अर्जुन मेड़तवाल एवं गेहरीलाल बाफना का परिचय प्रस्तुत किया। तेरापंथ महिला मंडल डोंबिवली की बहनों ने मंगलाचरण किया। कार्यक्रम में सभा मंत्री पारस बड़ाला, महिला मंडल अध्यक्ष सुधा सिंयाल, तेयुप अध्यक्ष विपिन मेहता आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राकेश एच कोठारी ने किया। पर्युषण पर्व के प्रथम दिवस आयोजित इस कार्यक्रम में खाद्य संयम और आत्मसाधना के महत्व को केंद्र में रखा गया।