चेंबूर स्कूल बस हादसे में छात्र विहान की मौत: महापौर के पुनर्जांच आदेश के दो हफ्ते बाद भी कार्रवाई ठप

चेंबूर में स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से 11 वर्षीय छात्र विहान की मौत के मामले में महापौर रितू तावडे के पुनर्जांच आदेश के दो सप्ताह बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी है। प्रशासनिक दावों और महापौर के बयानों में अंतर ने मामले को और गंभीर बना दिया है।

Update: 2026-07-30 06:37 GMT

मुंबई। मुंबई के चेंबूर इलाके में स्कूल बस पर पीपल का पेड़ गिरने से 11 वर्षीय मासूम छात्र विहान की दर्दनाक मौत के मामले में प्रशासनिक लापरवाही का नया पहलू सामने आया है। हादसे की जांच के बाद प्रस्तुत की गई शुरुआती रिपोर्ट को महापौर रितू तावडे ने खारिज करते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष और नए सिरे से जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, महापौर के आदेश के दो सप्ताह बीत जाने के बावजूद पुनर्जांच की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। पालिका प्रशासन की सुस्त कार्यप्रणाली और ढुलमुल रवैये को लेकर आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है।

हादसे के बाद गठित जांच समिति की रिपोर्ट में मुख्य जिम्मेदारियों को दरकिनार करते हुए संबंधित ठेकेदार पर केवल 5 लाख रुपये और सलाहकार पर महज 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। वहीं, उद्यान और सड़क विभाग के अधिकारियों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर महापौर सहित सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने कड़ा ऐतराज जताया था।

जनप्रतिनिधियों के विरोध के बाद 16 जुलाई को आयोजित आम सभा में महापौर रितू तावडे ने शुरुआती जांच रिपोर्ट को खारिज करते हुए पालिका प्रशासन को पूरे मामले की गहराई से दोबारा जांच करने के सख्त निर्देश दिए थे। इसके बावजूद दो सप्ताह बाद भी नई जांच शुरू नहीं होने से प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

इस मामले में पालिका प्रशासन और महापौर के बयानों में भी अंतर दिखाई दे रहा है। पालिका आयुक्त अश्विनी भिडे ने निष्पक्ष जांच के लिए विशेष अभियांत्रिकी उपायुक्त पुरुषोत्तम मालवदे और अभियांत्रिकी उपायुक्त शशांक भोरे की समिति का गठन किया था। शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद ठेकेदार पर जुर्माना लगाने के साथ निलंबित किए गए तीन अधिकारियों का निलंबन वापस लेने की बात कही गई थी।

हालांकि, प्रशासन का दावा है कि संबंधित अधिकारियों का निलंबन अभी तक रद्द नहीं किया गया है, जबकि महापौर रितू तावडे का कहना है कि आम सभा में विरोध के बाद उन अधिकारियों को फिर से निलंबित कर दिया गया है। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के कारण पूरे मामले को लेकर स्थिति और अधिक उलझी हुई नजर आ रही है।

महापौर रितू तावडे ने कहा कि वह स्वयं इस मामले का संज्ञान लेकर पालिका प्रशासन से पुनर्जांच की वर्तमान स्थिति की तत्काल जानकारी लेंगी। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मासूम विहान को न्याय दिलाने और लापरवाही बरतने वाले वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए प्रशासन कब ठोस कदम उठाता है।

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