मुंबई में 2241 करोड़ की वाटर टनल परियोजना को मंजूरी, पश्चिम उपनगरों तक पहुंचेगा समुद्र का मीठा पानी

मुंबई में 2,241 करोड़ रुपये की वाटर टनल परियोजना को मंजूरी मिल गई है। मनोरी डीसेलिनेशन प्लांट से पश्चिम उपनगरों तक पानी पहुंचाने की तैयारी तेज होगी।

Update: 2026-07-30 14:45 GMT

मुंबई में लगातार बढ़ रही पानी की मांग को पूरा करने और नागरिकों को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने एक बड़ा कदम उठाया है। पश्चिम उपनगरों के दहिसर, बोरिवली, कांदिवली और मालाड के निवासियों के लिए राहत भरी खबर है। बीएमसी की स्थायी समिति ने मनोरी स्थित डीसेलिनेशन प्रोजेक्ट से पानी की आपूर्ति के लिए 2,241 करोड़ रुपये की लागत वाली 7.175 किलोमीटर लंबी भूमिगत वाटर टनल के निर्माण प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति दे दी है।

वर्तमान में मुंबई शहर की दैनिक पानी की मांग लगभग 4,600 मिलियन लीटर है, जबकि उपलब्ध जल स्रोतों के माध्यम से प्रतिदिन केवल 4,100 मिलियन लीटर पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है। भविष्य में बढ़ती आबादी और संभावित जल संकट को देखते हुए मनोरी में डीसेलिनेशन प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के पहले चरण में प्रतिदिन 200 मिलियन लीटर मीठा पानी तैयार किया जाएगा।

इस पानी को कांदिवली स्थित मुख्य जल आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंचाने के लिए मनोरी से चारकोप पालिका उद्यान और वहां से कांदिवली के महावीर नगर तक 7.175 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का निर्माण किया जाएगा। यह सुरंग समुद्र के पानी को शोधित कर तैयार किए गए पेयजल को मौजूदा जल वितरण प्रणाली तक पहुंचाने का प्रमुख माध्यम बनेगी।

स्थायी समिति की बैठक में अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने वाला यह महत्त्वाकांक्षी प्रोजेक्ट वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि सुरंग जमीन से लगभग 104 से 128 मीटर की गहराई पर खोदी जाएगी। इसके निर्माण के लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। सुरंग का आंतरिक व्यास 2.5 मीटर होगा और दो टीबीएम मशीनों की सहायता से निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा।

परियोजना पूरी होने के बाद मनोरी डीसेलिनेशन प्लांट में शोधित किया गया पानी सीधे मौजूदा जल वितरण प्रणाली से जोड़ दिया जाएगा। इससे पश्चिम उपनगरों के लाखों नागरिकों को पानी की कमी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है और मुंबई के जल प्रबंधन को एक नई तथा मजबूत दिशा मिलेगी।

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