मुंबई में बीएमसी उपमहापौर और विधि समिति अध्यक्ष की बैठक के बाद मुख्य विधि अधिकारी पर कार्रवाई हुई।

मुंबई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के कानून विभाग में लंबे समय से चल रहे विवादों और अदालती मामलों में लगातार सामने आ रही लापरवाही के बीच प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। उपमहापौर संजय घाडी और विधि समिति अध्यक्ष दीक्षा हर्षद कारकर की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद विभाग की मुख्य विधि अधिकारी कोमल पंजाबी को जबरन छुट्टी पर भेज दिया गया है। इस कार्रवाई से बीएमसी के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मच गई है।

बैठक में कानून विभाग के कामकाज, अदालती मामलों में बीएमसी को हो रही किरकिरी और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई गई। विशेष रूप से अदालती आदेशों के पालन में देरी और सर्वोच्च न्यायालय की ओर से बीएमसी आयुक्त को जारी अवमानना नोटिस के घटनाक्रम को लेकर विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठे। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की नाराजगी के बीच तत्काल कार्रवाई करते हुए मुख्य विधि अधिकारी कोमल पंजाबी को जबरन छुट्टी पर भेजने का निर्णय लिया गया।


विभाग का नियमित कामकाज और कानूनी मामलों की पैरवी प्रभावित न हो, इसके लिए उप-विधि अधिकारी मोदले मैडम को प्रभारी विधि अधिकारी की जिम्मेदारी तत्काल प्रभाव से सौंप दी गई है। कानून विभाग के सर्वोच्च पद पर कार्यरत अधिकारी के खिलाफ इस तरह की त्वरित और कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई को बीएमसी के इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में बोरीवली बस डिपो तोड़क कार्रवाई का मामला भी प्रमुख रहा है। हाल ही में इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े का वेतन रोकने और 5 लाख का जुर्माना लगाने के आदेश दिए थे। इस घटनाक्रम के बाद बीएमसी के कानून विभाग की कार्यप्रणाली और कथित लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

बीएमसी की स्थायी समिति से लेकर विधि समिति तक की बैठकों में जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया था कि कानून विभाग के अधिकारियों के कमजोर कानूनी ज्ञान, अदालती सुनवाइयों की अधूरी तैयारी और वकीलों को सही तथ्य उपलब्ध नहीं कराने के कारण महानगरपालिका को अदालतों में बार-बार फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।

उपमहापौर संजय घाडी और विधि समिति अध्यक्ष दीक्षा हर्षद कारकर के कड़े रुख के बाद हुई इस कार्रवाई ने कानून विभाग के कामकाज पर प्रशासन की सख्ती का संकेत दिया है। साथ ही विभाग के अन्य लापरवाह अधिकारियों पर भी कार्रवाई की आशंका के बीच प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही का मुद्दा केंद्र में आ गया है।

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