मुंबई। शहर की हवा को साफ और जहरीले धुएं से मुक्त रखने के लिए बीएमसी ने ‘वायु प्रदूषण नियंत्रण एवं प्रवर्तन कार्य योजना 2026’ तैयार की है। मुंबई की महापौर रितू तावड़े, उपमहापौर संजय घाडी और बीएमसी आयुक्त अश्विनी भिड़े के मार्गदर्शन में इस योजना को पूरे शहर में कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

योजना के तहत बीएमसी के सभी 24 प्रशासनिक वार्डों में कम से कम 10-10 प्रदूषण हॉटस्पॉट चुने जाएंगे। इनमें बड़े निर्माण प्रोजेक्ट, कचरा जलाने वाली जगहें, मलबे के ढेर और भारी यातायात जाम वाले इलाके शामिल होंगे। इन स्थानों पर बीएमसी अधिकारी रोजाना निगरानी रखेंगे।

निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण के लिए बीएमसी की विशेष टीमें रोजाना कम से कम दो निर्माण स्थलों का अचानक निरीक्षण करेंगी। नियमों का उल्लंघन मिलने पर बिल्डरों और ठेकेदारों को काम रोकने की नोटिस दी जाएगी। जरूरत पड़ने पर निर्माण स्थल को सील भी किया जाएगा।

मानसून के बाद सड़कों पर जमा होने वाली धूल की सफाई के लिए अक्टूबर के पहले और दूसरे सप्ताह में विशेष डीप क्लीनिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत प्रमुख सड़कों, चौराहों और डिवाइडर को रिसाइकल पानी से धोने के साथ पानी का छिड़काव किया जाएगा।

बीएमसी ने निर्माण मलबा ले जाने वाले वाहनों को पूरी तरह ढककर चलाना भी अनिवार्य किया है, ताकि परिवहन के दौरान धूल न उड़े। खुले में कचरा या पत्तियां जलाने वालों पर सीसीटीवी कैमरों और मार्शलों के जरिए जुर्माना लगाया जाएगा।

बीएमसी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी इलाके में एयर क्वालिटी इंडेक्स लगातार तीन दिनों तक 300 से ऊपर रहता है, तो उस इलाके के 2 किलोमीटर के दायरे में चल रहे सभी प्रदूषणकारी निर्माण कार्य तुरंत बंद करा दिए जाएंगे। इस व्यवस्था के जरिए प्रदूषण हॉटस्पॉट की निगरानी से लेकर निर्माण गतिविधियों पर कार्रवाई तक वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त प्रवर्तन सुनिश्चित किया जाएगा।

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