समुद्रपुर महाविद्यालय में ग्रंथदान कार्यक्रम, प्राध्यापकों ने पुस्तकें दान कर समृद्ध किया पुस्तकालय
समुद्रपुर के विद्या विकास कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में 28 अक्टूबर 2026 को ग्रंथदान कार्यक्रम आयोजित हुआ। प्राध्यापकों ने सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रेरणादायी साहित्य और अन्य विषयों की पुस्तकें दान कर पुस्तकालय को समृद्ध बनाने में योगदान दिया।
तस्वीर में समुद्रपुर स्थित विद्या विकास कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में आयोजित ग्रंथदान कार्यक्रम के दौरान उपस्थित प्राध्यापक और अतिथिगण नजर आ रहे हैं।
महाराष्ट्र के समुद्रपुर स्थित विद्या विकास कला, वाणिज्य एवं विज्ञान महाविद्यालय में विद्यार्थियों में पढ़ने की रुचि विकसित करने और पुस्तकालय में संदर्भ साहित्य की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से 28 अक्टूबर 2026 को ग्रंथदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने अपनी निजी पुस्तकें पुस्तकालय को दान कीं।
महाविद्यालय के पुस्तकालय विभाग की ओर से बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक ‘ग्रंथदान उपक्रम’ का आयोजन किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में पठन-पाठन की रुचि बढ़ाना, ज्ञान का आदान-प्रदान करना और महाविद्यालय के पुस्तकालय को उपयोगी संदर्भ साहित्य से समृद्ध करना था।
कार्यक्रम में विद्या विकास शिक्षण संस्था की सचिव डॉ. नयना शिरभाते प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। महाविद्यालय के प्राचार्य प्रा. मेघश्याम ढाकरे, पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. प्रमोद अलोणे और नैक समन्वयक डॉ. शिल्पा समदूरकर भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए सामान्य ज्ञान, प्रतियोगी परीक्षाओं, पाठ्यक्रम, प्रेरणादायी साहित्य, आध्यात्मिक विचारों, पर्यावरण जागरूकता और अन्य जानकारीपूर्ण विषयों से संबंधित पुस्तकें पुस्तकालय को भेंट कीं।
इस ग्रंथदान से विद्यार्थियों को शैक्षणिक अध्ययन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, सामान्य ज्ञान बढ़ाने और व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी पठन सामग्री उपलब्ध होगी। पुस्तकों के महत्व को रेखांकित करने के साथ ही इस पहल के माध्यम से ज्ञान के आदान-प्रदान और पठन संस्कृति के विकास का संदेश दिया गया।
महाविद्यालय के पुस्तकालय को अधिक समृद्ध बनाने और विद्यार्थियों में नियमित पढ़ने की आदत विकसित करने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा। पुस्तकालय विभाग की पहल पर आयोजित इस उपक्रम का शैक्षणिक क्षेत्र में स्वागत किया जा रहा है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. प्रकाश तळे, डॉ. स्वाती येवतकर, डॉ. रामटेके, डॉ. आंबटकर, डॉ. मानवटकर, डॉ. सदानंद सारवे, राहुल पवार और नचिकेत ठवरी सहित अन्य लोगों ने परिश्रम किया।