कोल्हापुर: मुरगूड में नवकला मंच आयोजित करेगा भव्य किला निर्माण प्रतियोगिता 2026
बच्चों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास और किलों के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए नवकला मंच की ओर से 5वां वर्ष आयोजित किया जा रहा है।
मुरगूड में नवकला मंच द्वारा बच्चों के लिए आयोजित किला निर्माण प्रतियोगिता की मिट्टी की प्रतिकृति।
महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले के मुरगूड में छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली इतिहास और स्वराज्य के गढ़-किलों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से नवकला मंच की ओर से भव्य किले निर्माण प्रतियोगिता 2026 आयोजित की जा रही है। प्रतियोगिता का यह पांचवां वर्ष है। इसके माध्यम से मुरगूड शहर के बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता और कलात्मक प्रतिभा से स्वराज्य के ऐतिहासिक किलों की प्रतिकृतियां तैयार करने का अवसर मिलेगा।
प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों में छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास के प्रति रुचि विकसित करना, गढ़-किलों की स्थापत्य शैली और उनके ऐतिहासिक महत्व से परिचित कराना तथा बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना है। मिट्टी, पत्थर और प्राकृतिक सामग्री से ऐतिहासिक किलों की प्रतिकृतियां तैयार करते हुए बच्चों को इतिहास का अध्ययन करने और उससे प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा।
यह प्रतियोगिता केवल मुरगूड शहर के बच्चों के लिए आयोजित की गई है। इसमें प्रतिभागियों द्वारा बनाए जाने वाले किले काल्पनिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक गढ़-किलों पर आधारित होने चाहिए। किलों के निर्माण में प्लास्टिक और सीमेंट का उपयोग प्रतिबंधित है। निर्णायकों के निरीक्षण के समय किला पूरी तरह तैयार होना अनिवार्य है। साथ ही, प्रतिभागियों को अपने बनाए किले से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारी विस्तार से बतानी होगी। निर्णायकों का निर्णय अंतिम रहेगा।
प्रतियोगिता का मूल्यांकन सोमवार, 9 नवंबर 2026 को किया जाएगा। इसमें भाग लेने के इच्छुक बच्चे अक्षय पोतदार, अक्षय इलेक्ट्रॉनिक्स, मुरगूड से 8390859543 नंबर पर संपर्क कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए ओंकार पोतदार (9823614039), सिद्धांत पोतदार (7083049685), विनायक येरुडकर (8408098479) और दिग्विजय येरुडकर (9022665363) से संपर्क किया जा सकता है। नवकला मंच की ओर से बच्चों से प्रतियोगिता में भाग लेने की अपील की गई है।
बालमावलों के हाथों स्वराज्य के इतिहास को कलात्मक रूप में प्रस्तुत करने वाली यह पहल बच्चों को ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ने और उनकी रचनात्मक क्षमता को प्रोत्साहित करने का अवसर प्रदान करेगी।