कोस्टल रोड परियोजना के निर्माण स्थल पर मैंग्रोव क्षेत्र के पास क्रेन और मशीनें काम कर रही हैं।

मुंबई। कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना के कारण कांदिवली पश्चिम के चारकोप सेक्टर-8 में प्रभावित हुए करीब 100 पेड़ों को अब मुंबई से बाहर ले जाने के बजाय उसी इलाके में दोबारा लगाया जाएगा। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं, बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) और महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के अधिकारियों के प्रयासों से यह पहल संभव हुई है। इसके लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) भी प्राप्त कर लिए गए हैं।

27 अक्टूबर 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार, परियोजना से प्रभावित इन पेड़ों को पहले हटाकर पवई में रखा गया था और मुंबई से बाहर उनका पुनर्रोपण किए जाने की योजना थी। अब करीब 98 पेड़ों को चारकोप क्षेत्र में ही तीन स्थानों पर दोबारा लगाया जाएगा। स्थानीय स्तर पर पेड़ों को पुनर्स्थापित करने के इस निर्णय को परियोजना प्रभावित इलाके में हरियाली बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

इस पहल का पहला चरण बुधवार को सुबह 10.30 बजे चारकोप सेक्टर-8 स्थित दत्ता गुरु उद्यान में शुरू होगा। पुनर्रोपण के लिए दो अन्य स्थान भी निर्धारित किए गए हैं। इनमें तालाब के पास स्थित भूखंड और के. बी. पाटिल स्कूल के बाहर का परिसर शामिल है। इन स्थानों पर पेड़ों को दोबारा लगाने के लिए आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं।

स्थानीय निवासी और पर्यावरण कार्यकर्ता मिली शेट्टी ने बताया कि पेड़ों को हटाकर पवई में रखा गया था और वह उनके पुनर्रोपण की अनुमति मिलने का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने कहा, “अब मुझे चारकोप में अलग-अलग स्थानों पर उन्हीं 98 पेड़ों को दोबारा लगाने के लिए एनओसी मिल गई है, ताकि यहां की हरियाली बहाल की जा सके। बुधवार को बड़े पेड़ों को पुनर्रोपण के लिए वापस चारकोप लाया जाएगा।” उन्होंने उद्यान में पेड़ों को लगाने के लिए जगह उपलब्ध कराने पर म्हाडा के अधिकारियों का आभार भी जताया।

इस पहल का उद्देश्य बुनियादी ढांचे के विकास के बीच क्षेत्र की हरियाली को बनाए रखना और पक्षियों सहित अन्य शहरी वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की रक्षा करना है। पेड़ों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने के बजाय उसी इलाके में दोबारा लगाने से चारकोप की मौजूदा हरियाली को बचाए रखने में मदद मिलेगी।

कोस्टल रोड नॉर्थ परियोजना को वर्सोवा-भायंदर लिंक रोड के नाम से भी जाना जाता है। यह मुंबई कोस्टल रोड परियोजना का दूसरा चरण है। इस परियोजना के लिए 103.6554 हेक्टेयर वन क्षेत्र, जिसमें मैंग्रोव भूमि शामिल है, के उपयोग में बदलाव की आवश्यकता है। इसके प्रभाव से 45,000 से अधिक मैंग्रोव भी प्रभावित होंगे।

इसके बदले मुंबई के बाहर कुल 255 हेक्टेयर भूमि पर 1.37 लाख मैंग्रोव लगाने की क्षतिपूरक वनीकरण योजना है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) ने जुलाई में बीएमसी को दूसरे चरण की अंतिम मंजूरी दी थी। इससे पहले जून में बीएमसी की ट्री अथॉरिटी ने परियोजना के लिए करीब 1,900 पेड़ों को काटने की अनुमति दी थी।

इन मंजूरियों के बाद मैंग्रोव और पेड़ों को हटाने तथा निर्माण गतिविधियों में तेजी लाने का रास्ता खुला। परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में चारकोप में 98 पेड़ों को स्थानीय स्तर पर दोबारा लगाने की पहल विकास कार्यों के साथ क्षेत्र की हरियाली और शहरी वन्यजीवों के आवासों को बनाए रखने के प्रयासों का हिस्सा है।