स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय में गुरु पूर्णिमा उत्साह से मनाई गई, महर्षि व्यास जयंती पर विद्यार्थियों को मिला प्रेरक मार्गदर्शन
तऱ्हाड के स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय में महर्षि व्यास जयंती पर गुरु पूर्णिमा उत्साह से मनाई गई, जहां विद्यार्थियों को गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन मूल्यों पर प्रेरक मार्गदर्शन मिला।
तस्वीर में तऱ्हाड कसबे स्थित स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेत्तर कर्मचारी और छात्र गुरु पूर्णिमा कार्यक्रम के दौरान प्रतिमाओं के पास खड़े हैं।
तालुका के तऱ्हाड कसबे स्थित स्वामी विवेकानंद माध्यमिक विद्यालय में महाकाव्य महाभारत के रचयिता महर्षि व्यास की जयंती के अवसर पर गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत उत्साह और श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को गुरु के महत्व, गुरु-शिष्य परंपरा और जीवन में शिक्षा के मूल्यों से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के मुख्याध्यापक डी. एन. धनराज ने की। उनके शुभहस्तों से सरस्वती माता तथा स्वामी विवेकानंद की प्रतिमाओं का पूजन एवं माल्यार्पण किया गया। इसके बाद गुरु पूर्णिमा के महत्व पर विभिन्न शिक्षकों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
एस. एस. पाटील ने अपने संबोधन में महर्षि व्यास के जीवन से जुड़े विभिन्न प्रेरणादायी प्रसंगों पर प्रकाश डाला। वहीं बी. एन. देशमुख ने एक प्रेरक कहानी के माध्यम से गुरु के महत्व को विद्यार्थियों के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। एम. आर. पगारे ने प्राचीन काल की समृद्ध गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को बताया कि आज के आधुनिक युग में गुरु का स्थान मोबाइल ने ले लिया है और इस वास्तविकता को समझने की आवश्यकता है।
अध्यक्षीय भाषण में मुख्याध्यापक डी. एन. धनराज ने महाभारत के गुरु द्रोणाचार्य और उनके आदर्श शिष्य एकलव्य के जीवन से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अध्ययन और जीवन दोनों में निष्ठा बनाए रखने का प्रेरक संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन एस. बी. बंजारा ने किया, जबकि उपस्थितजनों का आभार डी. के. कोळी ने व्यक्त किया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी डी. ए. गिरासे, एस. आर. बाविस्कर, आर. एम. कुंवर, गुलाब अहिरे और भूषण पाटील सहित विद्यालय का शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर स्टाफ उपस्थित रहा। गुरु पूर्णिमा के इस आयोजन ने विद्यार्थियों को भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व और जीवन में गुरु के मार्गदर्शन की उपयोगिता का संदेश दिया।