कागल के शाहू कारखाने में ऊस की जैविक कीट प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण, किसानों को मिला वैज्ञानिक मार्गदर्शन
कागल के श्री छत्रपती शाहू सहकारी साखर कारखाना में भारतीय ऊस संशोधन संस्था के सहयोग से किसानों को ऊस की जैविक कीट प्रबंधन तकनीकों का वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया।
तस्वीर में बाएं से दाएं, मंच पर खड़े एक व्यक्ति ताली बजा रहे हैं, उनके पास खड़े उपाध्यक्ष अमरसिंह घोरपडे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेश थोरात को शॉल और गुलदस्ता देकर सम्मानित कर रहे हैं, जबकि पृष्ठभूमि में एक अन्य व्यक्ति और दाईं ओर कार्यकारी संचालक जितेंद्र चव्हाण ताली बजाते हुए दिख रहे हैं।
कोल्हापुर के कागल स्थित श्री छत्रपती शाहू सहकारी साखर कारखाना और लखनऊ की भारतीय ऊस संशोधन संस्था के संयुक्त तत्वावधान में ऊस फसल में कीटों के कम लागत, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ नियंत्रण के उद्देश्य से "ऊस पिकातील किडींचे जैविक पद्धतीने नियंत्रण" विषय पर मार्गदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्साहपूर्वक आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कारखाने के उपाध्यक्ष अमरसिंह घोरपडे ने की। इस अवसर पर वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेश थोरात ने प्रमुख मार्गदर्शक के रूप में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि ऊस सहित सभी फसलों में बढ़ते कीट प्रकोप और उससे उत्पादन में होने वाली कमी कृषि क्षेत्र के सामने गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए केवल रासायनिक उपायों पर निर्भर रहने के बजाय शोध संस्थानों, साखर कारखानों और किसानों को मिलकर जैविक कीट नियंत्रण पद्धतियों को अपनाना समय की आवश्यकता है।
डॉ. योगेश थोरात ने कहा कि जैविक तरीके से कीट नियंत्रण करने पर उत्पादन लागत कम होती है, भूमि की उर्वरता और मिट्टी की गुणवत्ता सुरक्षित रहती है तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि मित्र कीटों का संरक्षण और संवर्धन करने से रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग कम किया जा सकता है, जिससे ऊस का उत्पादन अधिक सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण होता है। उन्होंने किसानों से जैविक उपायों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
कारखाने के कार्यकारी संचालक जितेंद्र चव्हाण ने कहा कि कारखाने के संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय राजे विक्रमसिंह घाटगे ने अनुसंधान केंद्रों की आधुनिक तकनीक को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाने की दूरदर्शी परंपरा की शुरुआत की थी। उन्होंने बताया कि इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कारखाने की अध्यक्षा श्रीमती सुहासिनीदेवी घाटगे तथा शाहू ग्रुप के अध्यक्ष राजे समरजितसिंह घाटगे किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत कृषि पद्धतियों और निरंतर मार्गदर्शन के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। उनके अनुसार इससे ऊस उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ उत्पादन लागत कम हो रही है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हो रही है।
कार्यक्रम की शुरुआत ऊस विकास अधिकारी सुजयकुमार पाटील ने उपस्थित अतिथियों और किसानों का स्वागत कर प्रशिक्षण के उद्देश्य की जानकारी देकर की। प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने विभिन्न विषयों पर प्रश्न पूछकर विशेषज्ञों से विस्तृत मार्गदर्शन प्राप्त किया। कार्यक्रम के अंत में अक्ष कुलकर्णी ने आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान कागल स्थित श्री छत्रपती शाहू सहकारी साखर कारखाना में आयोजित "ऊस पिकातील किडींचे जैविक पद्धतीने नियंत्रण" प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. योगेश थोरात का उपाध्यक्ष अमरसिंह घोरपडे ने सम्मान किया। इस अवसर पर कार्यकारी संचालक जितेंद्र चव्हाण सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।