बीएमसी अस्पतालों में 'वैद्य एआई' की एंट्री, मरीजों से करेगा संवाद, डॉक्टरों का घटेगा काम का बोझ

मुंबई के बीएमसी अस्पतालों में 'वैद्य एआई' की शुरुआत के लिए फ्रैक्टल एनालिटिक्स से करार हुआ। जानिए मरीजों और स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका क्या असर होगा।

Update: 2026-07-03 14:16 GMT

तस्वीर में बीएमसी मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे, अतिरिक्त कमिश्नर प्राजक्ता वर्मा लवंगारे, फ्रैक्टल एनालिटिक्स के अधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति समझौता ज्ञापन (एमओयू) की फाइलें हाथ में लेकर खड़े हैं।

मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को डिजिटल तकनीक से सशक्त बनाने की दिशा में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार, 3 जुलाई 2026 को बीएमसी मुख्यालय में कमिश्नर अश्विनी भिडे की प्रमुख उपस्थिति में बीएमसी और फ्रैक्टल एनालिटिक्स लिमिटेड के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए विशेष रूप से विकसित ‘वैद्य एआई’ नामक एडवांस्ड प्लेटफॉर्म का बीएमसी के अस्पतालों और दवाखानों में प्रायोगिक तौर पर उपयोग किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के माध्यम से स्वास्थ्य प्रणाली के दैनिक कामकाज को अधिक सरल, तेज और प्रभावी बनाना है। बीएमसी के अनुसार, इस एआई-संचालित प्लेटफॉर्म के लागू होने से मुंबई के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले लाखों बहुभाषी नागरिकों और मरीजों के साथ प्रशासनिक संवाद पहले की तुलना में अधिक सहज हो सकेगा।

शुरुआती चरण में ‘वैद्य एआई’ मरीजों को प्राथमिक उपचार से संबंधित आवश्यक सहायता और मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा, जिससे ओपीडी में कार्यरत डॉक्टरों पर काम का दबाव कम होने की उम्मीद है। इसके अलावा यह प्लेटफॉर्म मरीजों की ब्लड टेस्ट सहित अन्य मेडिकल रिपोर्ट में मौजूद जटिल जानकारियों को सरल और स्थानीय भाषा में समझाने का कार्य भी करेगा, ताकि मरीज अपनी स्वास्थ्य रिपोर्ट को आसानी से समझ सकें।

बीएमसी ने बताया कि वर्तमान में अस्पतालों में संचालित ‘हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम’, आधिकारिक व्हाट्सएप चैटबॉट और बीएमसी के मुख्य प्रशासनिक पोर्टल को भी इस नए एआई चैटबॉट से जोड़ा जाएगा। इससे नागरिकों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उनकी अपनी भाषा में तत्काल उपलब्ध कराई जा सकेगी।

इस अवसर पर बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे ने कहा कि मुंबई जैसे विशाल महानगर में स्वास्थ्य सेवाओं के समक्ष प्रतिदिन कई बड़ी चुनौतियां आती हैं। ऐसे में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित यह तकनीकी पहल डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ के कार्यभार को काफी हद तक कम करेगी, जिससे अस्पताल का मानव संसाधन अधिक गंभीर मामलों पर अपना ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

बीएमसी की अतिरिक्त कमिश्नर प्राजक्ता वर्मा लवंगारे ने विश्वास जताया कि यह प्रणाली अस्पताल प्रबंधन के प्रशासनिक कार्यों को अधिक पारदर्शी बनाएगी और रियल-टाइम डैशबोर्ड मॉनिटरिंग के क्षेत्र में गेम-चेंजर साबित होगी।

यह प्लेटफॉर्म भारत सरकार के ‘इंडिया एआई मिशन’ का एक अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत बनाना है। शुरुआती पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस एआई प्रणाली को मुंबई के चुनिंदा प्रमुख अस्पतालों में लागू किया जा रहा है। इनमें परेल स्थित केईएम अस्पताल, कांदिवली का भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर सामान्य अस्पताल, घाटकोपर का राजावाड़ी अस्पताल तथा कुछ चुनिंदा नगर पालिका दवाखाने शामिल हैं।

परीक्षण अवधि के दौरान बीएमसी प्रशासन स्वास्थ्य कर्मचारियों को इस प्रणाली के संचालन का प्रशिक्षण देगा। साथ ही मरीजों से प्राप्त फीडबैक और डेटा सुरक्षा मानकों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस बैठक में उपायुक्त प्रशांत गायकवाड़, शरद उघड़े, मेडिकल शिक्षा निदेशक शैलेश मोहिते तथा फ्रैक्टल एनालिटिक्स के श्रीकांत वेलमकन्नी, सूरज अमोणकर और शुभेंदु कानडे सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह पहल मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक के उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

Tags:    

Similar News