साकीनाका मॅनहोल हादसे के बाद गरमाया 'एल' वार्ड के विभाजन का मुद्दा, बीएमसी कमिश्नर को पत्र
मुंबई के साकीनाका में मॅनहोल हादसे के बाद 'एल' वार्ड के विभाजन की मांग तेज। कांग्रेस नेता अशरफ आज़मी ने बीएमसी कमिश्नर को पत्र लिखकर उठाए गंभीर सवाल।
मुंबई के कुर्ला-साकीनाका स्थित खैरानी रोड पर खुले मॅनहोल में गिरकर एक 55 वर्षीय नागरिक की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। इस दुखद हादसे ने मुंबई के सबसे बड़े और संवेदनशील 'एल' वार्ड को दो हिस्सों में विभाजित करने की मांग को फिर से तेज कर दिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका में कांग्रेस के समूह नेता अशरफ आज़मी ने बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिडे को कड़ा पत्र लिखकर इस लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को जनहित में तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की है।
अशरफ आज़मी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि कुर्ला, साकीनाका, चांदीवली और आसपास के घने आवासीय व औद्योगिक क्षेत्रों को समेटने वाला 'एल' वार्ड मुंबई का सबसे बड़ा प्रशासनिक वार्ड है। वर्तमान में इस वार्ड के अंतर्गत लगभग 9 लाख की आबादी और 16 निर्वाचन वार्ड आते हैं। आज़मी का तर्क है कि इतनी विशाल आबादी और जटिल भौगोलिक क्षेत्र का प्रबंधन केवल एक वार्ड कार्यालय के माध्यम से करना व्यावहारिक रूप से असंभव है, जिसके कारण प्रशासनिक शिथिलता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि पिछली बीएमसी के कार्यकाल में इस वार्ड को दो भागों में बांटने का विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर उसे मंजूरी दी गई थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण वह आज भी कागजों तक ही सीमित है।
कांग्रेस नेता ने साकीनाका मॅनहोल दुर्घटना का उल्लेख करते हुए बीएमसी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एक बेकसूर नागरिक की जान जाना मानसून पूर्व तैयारियों, नाला सफाई की निगरानी और फील्ड अधिकारियों की सतर्कता के दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को रेखांकित करते हुए कहा कि 'एल' वार्ड में हर साल होने वाला भारी जलजमाव, नालों की अपर्याप्त सफाई, विकास कार्यों में देरी और जनता की शिकायतों के निपटारे में विलंब नागरिकों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं।
अशरफ आज़मी ने कमिश्नर अश्विनी भिडे से आग्रह किया है कि वे इस लंबित प्रस्ताव पर प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू कर इसे जल्द पूरा करें। उनका मानना है कि वार्ड के विभाजन से ही प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता आएगी, जिससे भविष्य में ऐसी जानलेवा लापरवाही को रोका जा सकेगा और नागरिकों को प्रभावी सेवाएं मिल सकेंगी।