नाशिक में महागोदा आरती का विश्व रिकॉर्ड, 6,233 श्रद्धालुओं ने एक साथ की गोदा आरती
नाशिक में सिंहस्थ महाकुंभ के धर्मध्वजारोहण समारोह के दौरान 6,233 श्रद्धालुओं ने एक साथ गोदा आरती कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में सात दिनों के भीतर दूसरा विश्व रिकॉर्ड दर्ज हुआ।
नाशिक में गोदावरी नदी तट पर आयोजित महागोदा आरती समारोह के दौरान विशाल मंच पर उपस्थित साधु-संत एवं विशिष्ट अतिथि।
नाशिक ने धार्मिक और आध्यात्मिक परंपरा के क्षेत्र में एक और विश्व रिकॉर्ड अपने नाम किया है। नाशिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ पर्व के धर्मध्वजारोहण समारोह के अवसर पर आयोजित महागोदा आरती में 6,233 श्रद्धालुओं ने एक साथ हिस्सा लेकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नया विश्व रिकॉर्ड दर्ज कराया। खास बात यह है कि महज एक सप्ताह के भीतर नाशिक के नाम यह दूसरा विश्व रिकॉर्ड दर्ज हुआ है। पालकमंत्री गिरीश महाजन के मार्गदर्शन में आयोजित इस ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू प्रमुख रूप से उपस्थित रहीं।
शनिवार को गोदावरी नदी के तट पर आयोजित महागोदा आरती केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपरा, आस्था और सामाजिक एकता का प्रदर्शन भी हुआ। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने हाथों से गोदा पूजन किया। मंत्रोच्चार, शंखनाद, साधु-संतों की उपस्थिति और हजारों श्रद्धालुओं के हाथों में प्रज्वलित आरती के दीपों से रामतीर्थ परिसर भक्तिमय हो उठा।
इस समारोह की एक अन्य विशेषता नाशिक जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्रों से जनजातीय समुदाय की भागीदारी रही। जिले के 650 गांवों से लगभग 6,500 जनजातीय समुदाय के लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। इस सहभागिता के माध्यम से भारतीय संस्कृति के उस स्वरूप को प्रदर्शित किया गया, जो धार्मिक स्थलों और ऐतिहासिक परंपराओं के साथ-साथ आदिवासी समाज की लोकपरंपराओं, प्रकृति से उसके संबंध और सांस्कृतिक विरासत में भी समाहित है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अपने संबोधन में सनातन संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में जनजातीय समाज के महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया। गोदावरी के तट पर विभिन्न समाजों के लोगों के एक साथ आने से सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का संदेश भी दिया गया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर सूखे से प्रभावित किसानों की समस्याओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि किसानों के सम्मान और प्रतिष्ठा को बनाए रखते हुए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से उन्हें आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस तरह धार्मिक आयोजन के साथ किसानों से जुड़े सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता मिली।
सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच नाशिक में सात दिनों के भीतर दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज हुए हैं। इससे पहले 25 अक्टूबर 2026 को इसी रामतीर्थ परिसर में 517 शंखवादकों ने एक साथ शंखनाद कर पहला विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस उपलब्धि की चर्चा के बीच अब 6,233 श्रद्धालुओं की सामूहिक गोदा आरती ने दूसरा विश्व रिकॉर्ड स्थापित कर दिया।
हजारों श्रद्धालुओं की एक साथ आरती, एक सुर में गूंजते आरती के स्वर और गोदामाई के चरणों में सामूहिक आस्था के समर्पण ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। महज सात दिनों के अंतराल में दो विश्व रिकॉर्ड दर्ज कर नाशिक ने सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई है।
गोदावरी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली महागोदा आरती नाशिक के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखेगी।