नाशिक में आगामी सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के सिलसिले में मीडिया को संबोधित करते जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज और अन्य साधु-संत।   

आगामी सिंहस्थ कुंभमेले से पहले साधुग्राम की जमीन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। हर 12 साल में आयोजित होने वाले कुंभमेले के दौरान साधुग्राम के लिए जमीन की व्यवस्था को लेकर पैदा होने वाली समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग उठी है। जगद्गुरु नरेंद्राचार्य महाराज ने सरकार से साधु-महंतों के लिए साधुग्राम की जमीन स्थायी रूप से आरक्षित करने का निर्णय लेने की मांग की है।

नासिक दौरे पर आए नरेंद्राचार्य महाराज ने मीडिया से बातचीत के दौरान आगामी सिंहस्थ कुंभमेले की तैयारियों, साधुग्राम के लिए जमीन, किसानों की समस्याओं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हर बार कुंभमेले के आयोजन के समय साधुग्राम के लिए जमीन का प्रश्न सामने आता है। ऐसे में शासन को इस समस्या का स्थायी समाधान करना चाहिए और साधु-संतों के लिए जमीन आरक्षित रखनी चाहिए।

किसानों के साथ अन्याय नहीं हो, मध्यस्थता को तैयार साधु-संत

साधुग्राम के लिए जमीन अधिग्रहित करते समय संबंधित किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। सरकार को किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा समय पर देना चाहिए। नरेंद्राचार्य महाराज ने कहा कि किसानों का कुंभमेले का विरोध करने का रुख नहीं है, लेकिन उनके जमीन संबंधी अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार इस मुद्दे पर उचित निर्णय नहीं लेती है तो साधु-संत किसानों और शासन के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार हैं।

गोदावरी नदी का प्रदूषण रोकने पर दिया जोर

नरेंद्राचार्य महाराज ने कुंभमेले के दौरान गोदावरी नदी को प्रदूषण से बचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शासन को विशेष ध्यान रखना चाहिए कि कुंभमेले के आयोजन के दौरान गोदावरी नदी प्रदूषित न हो। प्रदूषण से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचता है, इसलिए कुंभमेले की तैयारियों में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सिंहस्थ कुंभमेले के लिए साधुग्राम तैयार करते समय केवल आवश्यकता के अनुसार ही पेड़ों की कटाई की जाए। जिन पेड़ों को काटना जरूरी हो, उनके बदले बड़े पैमाने पर नए पौधे लगाए जाएं और वृक्षों का पुनर्रोपण किया जाए। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

सूखे से प्रभावित किसानों की मदद करेंगे साधु-संत

राज्य में सूखे की स्थिति को देखते हुए किसानों की सहायता के लिए साधु-संत भी आगे आएंगे। नरेंद्राचार्य महाराज ने बताया कि किसानों को बीज, पशुओं के लिए चारा और जरूरतमंद नागरिकों को खाद्यान्न उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे।

उन्होंने वृक्षारोपण के साथ लगाए गए पौधों को सुरक्षित रखने और उन्हें जीवित बनाए रखने की जरूरत भी बताई। उनके अनुसार, केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी देखभाल और संरक्षण करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

साधु-संत सरकार के सामने नहीं रखेंगे अव्यावहारिक मांगें

सिंहस्थ कुंभमेले के लिए साधुग्राम तैयार करते समय पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं की उचित व्यवस्था जरूरी है। हालांकि, नरेंद्राचार्य महाराज ने कहा कि साधु-संत सरकार के सामने अव्यावहारिक मांगें नहीं रखेंगे। उपलब्ध सुविधाओं में भी साधु-महंत रह सकते हैं।

उन्होंने पानी की उपलब्धता को लेकर अनावश्यक विवाद पैदा नहीं करने की बात कही। साथ ही उम्मीद जताई कि मानसून के बाद पानी की उपलब्धता बढ़ेगी।

नरेंद्राचार्य महाराज ने शासन से कुंभमेले की तैयारियों में साधु-संतों की धार्मिक परंपराओं, किसानों के जमीन संबंधी अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण, तीनों पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समन्वय के साथ निर्णय लेने का आह्वान किया। साधुग्राम की जमीन को स्थायी रूप से आरक्षित करने की मांग के साथ किसानों के मुआवजे और गोदावरी के प्रदूषण का मुद्दा भी आगामी कुंभमेले की तैयारियों के महत्वपूर्ण पहलुओं के रूप में सामने आया है।

Tags: