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मुंबई में महाराष्ट्र आवास एवं क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MHADA) अपने खाली पड़े मकानों से हर महीने 1.17 करोड़ रुपये की किराया आय जुटाने की तैयारी में है। प्राधिकरण के कोंकण बोर्ड ने ठाणे जिले के कल्याण स्थित शिरढोण आवासीय परियोजना के 1,150 मकान केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को किराये पर देने की योजना को अंतिम रूप दिया है। इस प्रस्ताव के तहत MHADA को 2.34 करोड़ रुपये की सुरक्षा जमा राशि भी मिलने की उम्मीद है।

शिरढोण परियोजना में 18,000 से अधिक मकान हैं। इनमें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और निम्न आय वर्ग के लिए मूल रूप से निर्धारित मकान भी शामिल हैं। प्रस्तावित समझौते के तहत परियोजना के बिना बिके मकानों को CISF के इस्तेमाल के लिए किराये पर दिया जाएगा।

किराये पर दिए जाने वाले मकानों का क्षेत्रफल 300 से 400 वर्ग फुट के बीच है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए निर्धारित 300 वर्ग फुट के मकान का मासिक किराया 8,000 रुपये तय किया गया है, जबकि निम्न आय वर्ग (LIG) के 400 वर्ग फुट के मकान का मासिक किराया 13,000 रुपये होगा। प्रत्येक मकान के लिए दो महीने के किराये के बराबर सुरक्षा जमा राशि ली जाएगी।

कोंकण बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि समझौते का मसौदा CISF को भेज दिया गया है। फिलहाल प्रस्ताव को सुरक्षा बल के केंद्रीय मुख्यालय से अंतिम मंजूरी मिलने का इंतजार है। MHADA ने स्पष्ट किया है कि औपचारिक अनुबंध तभी किया जाएगा, जब सुरक्षा जमा राशि और शुरुआती किराये का भुगतान प्राधिकरण को प्राप्त हो जाएगा।

इस व्यवस्था से नियमित किराया आय मिलने के बावजूद मकानों के रखरखाव की जिम्मेदारी MHADA के पास ही रहेगी। किराये पर दिए गए मकानों से संबंधित संपत्ति कर और पानी के बिलों का भुगतान भी प्राधिकरण को करना होगा।

प्राधिकरण के अधिकारियों को उम्मीद है कि शिरढोण आवासीय परिसर में CISF के जवानों की स्थायी मौजूदगी से क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। इससे आवासीय परिसर का माहौल बेहतर होने और परियोजना में शेष मकानों की भविष्य में मांग बढ़ने की संभावना भी जताई गई है। इस तरह, प्रस्तावित समझौता MHADA के लिए नियमित राजस्व जुटाने के साथ शिरढोण आवासीय परियोजना में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है।