महाराष्ट्र के धुले जिले में सूखे और फसल की बर्बादी के कारण किसान परिवार आजीविका की तलाश में पलायन कर रहे हैं, जिससे बच्चों की स्कूली शिक्षा प्रभावित हो रही है।

छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के शौर्य और स्वाभिमान का इतिहास संजोने वाली महाराष्ट्र की धरती पर आज किसान परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। धुले जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पानी की कमी, फसलों के नुकसान और खेती की बढ़ती लागत ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। हालात ऐसे हैं कि कुछ किसान और खेतिहर मजदूर पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने की कटाई के लिए पलायन कर रहे हैं, जबकि कुछ परिवारों को ईंट भट्टों पर मजदूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

त-हाड़ी प्रतिनिधि के अनुसार, खेतों में दिन-रात मेहनत करने के बावजूद जब किसानों के हाथ में पर्याप्त पैसा नहीं बचता, तो उनके सामने परिवार का खर्च चलाने और बच्चों की पढ़ाई पूरी कराने का सवाल खड़ा हो जाता है। इसी आर्थिक परेशानी के चलते धुले जिले के कुछ किसान और खेतिहर मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं।

इस संकट का सबसे गंभीर असर बच्चों की शिक्षा पर पड़ने की आशंका है। जिस उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें और पीठ पर स्कूल का बस्ता होना चाहिए, उस उम्र में उनके सामने मजदूरी की वास्तविकता खड़ी हो रही है। परिवारों के रोजगार के लिए पलायन करने से बच्चों की पढ़ाई बाधित होने का खतरा बढ़ रहा है।

सूखे का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे किसानों के पूरे परिवार का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। फसलें संकट में आने से किसानों की आय घटती है और परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के साथ बच्चों की शिक्षा जारी रखने की चुनौती खड़ी हो जाती है।

ऐसे में सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने और पलायन करने वाले परिवारों के बच्चों की शिक्षा जारी रखने के लिए ठोस सरकारी उपायों की आवश्यकता है।

जिस भूमि ने स्वराज्य का इतिहास रचा, उसी भूमि के किसान परिवारों के बच्चों को शिक्षा के लिए संघर्ष करना पड़े, यह समाज के लिए आत्ममंथन का विषय है। किसानों को खेती से सम्मानजनक आजीविका मिलना, उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल सुनिश्चित होना और आर्थिक परिस्थितियों के कारण बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकना आज की प्रमुख जरूरतें हैं। किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने से खेती को सहारा मिलेगा और बच्चों की शिक्षा सुरक्षित रहने से उनका भविष्य संवर सकेगा।

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