मुंबई के चेंबूर में आयोजित नवरात्रि अनुष्ठान के दौरान 'णमोत्थुणं साधना' कार्यक्रम में भक्ति गीत का संगान करतीं साध्वीवृंद (बाएं से दाएं: साध्वी मधुरप्रभा, साध्वी मुदितप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा) और दक्षिण दिशा में आसीन साध्वी निर्वाणश्री।

मुंबई। चेंबूर में नवरात्रि अनुष्ठान के आठवें दिन ‘णमोत्थुणं साधना व रहस्य’ विषय पर विशेष विवेचन किया गया। युगप्रधान आचार्य महाश्रमण की विदुषी सुशिष्या साध्वी निर्वाणश्री के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यक्रम में णमोत्थुणं स्तुति पाठ के महत्व, उसकी आध्यात्मिक शक्ति और जैन परंपरा में उसके स्थान पर प्रकाश डाला गया।

उपस्थित संभागियों को संबोधित करते हुए साध्वी निर्वाणश्री ने कहा कि णमोत्थुणं जैन शासन का एक प्रभावक स्तुति पाठ है। यह मंत्र सिद्ध भगवान और अर्हत् भगवान के दिव्य गुणों के गुंफन से जुड़ा है, जिनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए यह मंत्र प्रदान किया गया है।



साध्वी डॉ. योगक्षेमप्रभा ने अपने वक्तव्य में मंत्रों की शक्ति और उनके प्रभाव पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि मंत्रों का जगत विशाल है, उनकी शक्ति अपार है और उनका प्रभाव अचिन्त्य है। जैन परंपरा के प्रभावक मंत्रों में णमोत्थुणं का भी गौरवपूर्ण स्थान है। इस एक स्तुति का प्रत्येक पद मानो एक मंत्र है।

उन्होंने कहा कि गुरुदेव से इस मंत्र को प्राप्त कर निरंतर उसका पाठ करना चाहिए, ताकि शांति, सुख और समाधि की प्राप्ति हो सके। यही काम्य है।

कार्यक्रम के दौरान साध्वी योगक्षेमप्रभा, साध्वी लावण्यप्रभा, साध्वी कुंदनयशा, साध्वी मुदितप्रभा और साध्वी मधुरप्रभा ने समवेत स्वरों में ‘नमोस्तु तीर्थंकर भगवान’ गीत का संगान किया। इससे कार्यक्रम का वातावरण भक्तिमय हो गया। चेंबूर नवरात्रि अनुष्ठान के आठवें दिन का यह आयोजन णमोत्थुणं साधना के आध्यात्मिक महत्व और जैन परंपरा में स्तुति पाठ की भूमिका पर केंद्रित रहा।

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