कोल्हापुर के कागल स्थित बोरवडे विद्यालय में दशहरा महोत्सव के अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे छात्र-छात्राएं, शिक्षक और अतिथि।

कोल्हापुर जिले के कागल तालुका स्थित बोरवडे विद्यालय में पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ दशहरा महोत्सव उत्साहपूर्वक मनाया गया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक परिधान पहनकर भारतीय संस्कृति की झलक प्रस्तुत की। वहीं, गरबा-दांडिया और दुर्गा माता के गीतों की प्रस्तुतियों से विद्यालय का वातावरण उत्साहपूर्ण हो गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के मुख्याध्यापक जे. के. पाटील ने की। दशहरा महोत्सव के अवसर पर छात्र-छात्राएं विभिन्न पारंपरिक वेशभूषाओं में विद्यालय पहुंचे। कुछ विद्यार्थियों ने वारकरी संप्रदाय की वेशभूषा धारण की, जबकि कुछ विद्यार्थी सदरा और जैकेट पहनकर कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्याध्यापक जे. के. पाटील ने सभी विद्यार्थियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान आर. पी. वारके और पी. डी. वारके ने विद्यार्थियों को दशहरा उत्सव का महत्व समझाया। इसके बाद विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। गरबा-दांडिया और दुर्गा माता के गीतों की प्रस्तुतियों के दौरान विद्यार्थियों ने संगीत की धुन पर उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक परिधानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने महोत्सव को विशेष स्वरूप दिया।

इस अवसर पर मुख्याध्यापक जे. के. पाटील, पी. डी. वारके, आर. पी. वारके, एस. एस. जितकर, राधिका शिंदे, रेखा मांगोरे, अपूर्वा साठे, आकाश कांबळे, श्रीधर कांबळे, कृष्णात साठे, विलास कांबळे और मानसिंग जठार उपस्थित थे।

बोरवडे विद्यालय में आयोजित दशहरा महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा, गरबा-दांडिया और दुर्गा माता के गीतों के माध्यम से विद्यार्थियों की सांस्कृतिक भागीदारी देखने को मिली।

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