मुंबई में किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराने के लिए म्हाडा दिवाली के बाद ऑनलाइन पोर्टल शुरू करेगा।  

मुंबई में नौकरी, कारोबार या पढ़ाई के लिए आने वाले लोगों को अब कम किराये पर घर तलाशने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) ने किराये पर घर उपलब्ध कराने के लिए टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की मदद से एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल तैयार किया है। यह पोर्टल दिवाली के बाद शुरू किया जाएगा, जिससे मुंबई में किफायती किराये पर आवास तलाशने की प्रक्रिया आसान हो सकेगी।

म्हाडा की ओर से तैयार महाराष्ट्र राज्य किराया आवास नीति का उद्देश्य किफायती, समावेशी, पारदर्शी और सुगम आवास आवंटन व्यवस्था विकसित करना है। मुंबई में आवासीय संपत्तियों का किराया काफी बढ़ चुका है। ऐसे में प्रस्तावित पोर्टल के माध्यम से लोगों को अपेक्षाकृत कम दरों पर किराये के मकान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

इस पोर्टल को तैयार करते समय समाज के विभिन्न वर्गों की आवास संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखा गया है। इसमें विद्यार्थी, परियोजना प्रभावित लोग, चिकित्सा पेशेवर, विभिन्न आय वर्गों के नागरिक, वरिष्ठ नागरिक, पर्यटक, प्रवासी कामगार, कामकाजी महिलाएं और बेघर लोग शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य इन वर्गों के लिए किराये पर आवास तलाशने और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं को अधिक सुलभ बनाना है।

पोर्टल पर किरायेदार प्रबंधन, मकानों के रखरखाव से जुड़े रिकॉर्ड, उपलब्ध आवासों की जानकारी और दस्तावेजों को संग्रहित करने जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी। इसके अलावा किराया समझौते, ऑनलाइन स्टांप शुल्क भुगतान और पंजीकरण की प्रक्रियाएं भी उपलब्ध होंगी। इन सुविधाओं को मानवीय हस्तक्षेप के बिना सुगमता से पूरा करने की व्यवस्था की जा रही है।

किराया आवास नीति के मसौदे में निजी डेवलपर्स की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कई प्रोत्साहनों पर विचार किया जा रहा है। इनमें जीएसटी, स्टांप शुल्क, पंजीकरण शुल्क और संपत्ति कर में रियायतें, विकास शुल्क में छूट, टीडीआर के लाभ, एफएसआई संबंधी शर्तों में ढील तथा आयकर में छूट जैसे उपाय शामिल हैं।

म्हाडा का यह प्रस्तावित पोर्टल मुंबई में किराये के आवास की तलाश करने वाले लोगों के लिए एक ही मंच पर मकानों की उपलब्धता और किराये से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। दिवाली के बाद इसके शुरू होने से किफायती आवास की तलाश और किरायेदारी से जुड़ी औपचारिकताओं को डिजिटल माध्यम से पूरा करने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।