महाराष्ट्र के शिरपुर तालुका में कम बारिश और कीटों के प्रकोप से परेशान किसान नमो शेतकरी महासन्मान निधि की लंबित किस्तों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।   

महाराष्ट्र के शिरपुर तालुका और त-हाडी क्षेत्र के पात्र किसान पहले से ही कम बारिश, फसलों में कीट-रोगों के बढ़ते प्रकोप और खेती की बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। इस बीच ‘नमो शेतकरी महासन्मान निधि’ योजना की नौवीं और दसवीं किस्त का इंतजार उनकी आर्थिक चिंता बढ़ा रहा है। सूखे जैसी स्थिति के बीच सरकारी आर्थिक सहायता नहीं मिलने से किसानों के सामने खेती का आर्थिक प्रबंधन करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

शिरपुर तालुका में इस वर्ष बारिश कम होने के कारण खरीफ सीजन की फसलों की वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ा है। प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, तालुका में औसत के मुकाबले केवल 63 प्रतिशत बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। बारिश में लंबे अंतराल और अनियमितता के कारण फसलों को पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में किसान उत्पादन में गिरावट की आशंका जता रहे हैं।

कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों पर कीटों और बीमारियों का प्रकोप बढ़ने से किसानों को महंगी दवाओं का छिड़काव करना पड़ रहा है। बीज, खाद, दवाइयों, मजदूरी और खेती से जुड़ी अन्य सामग्रियों की लागत बढ़ने से उत्पादन का आर्थिक गणित बिगड़ गया है। इसके बावजूद फसलों से अपेक्षित उपज और आमदनी मिलेगी या नहीं, इसकी कोई निश्चितता नहीं है। इस स्थिति ने किसानों की आर्थिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

‘नमो शेतकरी महासन्मान निधि’ और केंद्र सरकार की ‘पीएम किसान सम्मान निधि’ इन दोनों योजनाओं के माध्यम से पात्र किसानों को सालाना कुल 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है। यह राशि किसानों के लिए बीज, खाद, कीटनाशक और खेती की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में उपयोगी होती है।

हालांकि, नमो शेतकरी महासन्मान निधि योजना की नौवीं और दसवीं किस्त का इंतजार कर रहे किसानों के सामने अब यह सवाल है कि उन्हें आर्थिक सहायता कब मिलेगी। खेती की बढ़ती लागत, फसलों को नुकसान होने की आशंका और हाथ में नकदी की कमी के कारण आगामी कृषि कार्यों की योजना बनाने में उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

शिरपुर तालुका और त-हाडी क्षेत्र के पात्र किसान लंबित किस्तों की स्थिति को लेकर स्पष्ट जानकारी मिलने और आर्थिक सहायता जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद कर रहे हैं। कम बारिश और फसलों पर मंडराते संकट के बीच समय पर आर्थिक मदद मिलने से उन्हें रबी सीजन की तैयारी में राहत मिल सकती है।

ऐसे में किसान वर्ग की अपेक्षा है कि संबंधित प्रशासनिक तंत्र लंबित किस्तों की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करे और पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करे। नौवीं और दसवीं किस्त को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच किसानों की नजर अब सरकारी सहायता मिलने पर टिकी है।

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