लातूर जिले के कासार बालकुंदा गांव में शहीद जवान समाधान मधाले के पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर अंतिम विदाई देते सैन्य अधिकारी और ग्रामीण।

लातूर जिले के निलंगा तालुका स्थित कासार बालकुंदा गांव में बुधवार को शहीद जवान समाधान महिपती मधाले का शासकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। कुछ महीने पहले स्वतंत्रता दिवस पर स्कूल में तिरंगा फहराने वाले समाधान का पार्थिव शरीर जब उसी तिरंगे में लिपटकर गांव पहुंचा, तो पूरा गांव शोक में डूब गया। मां की चीखें, पत्नी का विलाप और पिता को तलाशती पांच साल की मासूम बेटी का चेहरा देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। ‘समाधान मधाले अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच गांव ने अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

निलंगा तालुका के कासार बालकुंदा निवासी समाधान मधाले जम्मू में भारतीय सेना की 7 महार रेजिमेंट में तैनात थे। 19 अक्टूबर को रात करीब आठ बजे ड्यूटी के दौरान उनका निधन हो गया। समाधान 17 दिसंबर 2014 को सेना में भर्ती हुए थे और उन्होंने करीब 12 साल तक देश की सेवा की। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई।

जम्मू-कश्मीर से विमान के जरिए उनका पार्थिव शरीर हैदराबाद लाया गया। इसके बाद बसवकल्याण, ममदापुर, देवीहल्ली और मिरगाली होते हुए पार्थिव शरीर कासार बालकुंदा पहुंचा। बुधवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे ग्राम पंचायत कार्यालय के सामने पार्थिव शरीर पहुंचते ही अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण जुट गए।

सुबह करीब 10 बजे पार्थिव शरीर घर पहुंचा तो परिवार के सदस्यों का दुख आंसुओं और चीखों में फूट पड़ा। बेटे का निष्प्राण शरीर देखकर मां की चीख ने वहां मौजूद लोगों को झकझोर दिया। पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर पत्नी लगातार रोती रही। जिस मां ने बेटे को बचपन से पाल-पोसकर बड़ा किया था, उसी के सामने आज उसका बेटा निश्चल पड़ा था। परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा था।

इस दर्दनाक दृश्य के बीच पांच साल की मासूम बेटी के सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। जिस उम्र में बच्चे पिता की उंगली पकड़कर चलना और उनके कंधों पर बैठकर दुनिया देखना सीखते हैं, उस उम्र में इस बच्ची को अब पिता की यादों के सहारे जीवन बिताना होगा। पिता को खोने के इस दर्द ने अंतिम विदाई के माहौल को और भी गमगीन कर दिया।

समाधान मधाले की गांव से जुड़ी आखिरी याद ने भी लोगों को भावुक कर दिया। 15 अगस्त को वह गांव आए थे और उस दिन उनके हाथों स्कूल में ध्वजारोहण किया गया था। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और देशसेवा से जुड़ी अपनी यादें भी साझा की थीं। देश का तिरंगा गर्व से फहराने वाले समाधान कुछ ही समय बाद उसी तिरंगे में लिपटकर गांव लौटेंगे, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।

बुधवार सुबह करीब 11 बजे गांव के श्मशान घाट पर सैन्य और शासकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पार्थिव शरीर पर लिपटा तिरंगा उनकी पत्नी और मां को सौंपा गया। तिरंगा हाथ में लेते ही दोनों का विलाप फिर से तेज हो गया। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी आंसुओं से भर गईं। पूरे गांव ने नम आंखों से वीर जवान को अंतिम विदाई दी।

इस अवसर पर विधायक अभिमन्यु पवार, सैनिक कल्याण विभाग के अधिकारी, पूर्व और वर्तमान सैनिक, उपजिलाधिकारी शरद झाडके, अपर तहसीलदार शिवाजी कदम और पुलिस उपाधीक्षक विशाल घुमे सहित कई गणमान्य लोगों ने वीर जवान समाधान मधाले को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अंतिम संस्कार के साथ समाधान मधाले का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया, लेकिन देश के लिए उनकी करीब 12 वर्षों की सेवा और 15 अगस्त को स्कूल में फहराया गया तिरंगा गांव की स्मृतियों में हमेशा जीवित रहेगा। उनके निधन से एक मां ने अपना बेटा, पत्नी ने अपना जीवनसाथी और पांच साल की बेटी ने पिता का स्नेह खो दिया। देश की रक्षा में अपना जीवन समर्पित करने वाले इस वीर जवान को कासार बालकुंदा ने अश्रुपूर्ण विदाई देकर सम्मानपूर्वक अंतिम सलाम किया।

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