महाराष्ट्र के लातूर शहर के प्रकाशनगर इलाके में महिला बचत समूहों की सदस्यों को पैसे दोगुने करके लौटाने का लालच देकर 1 करोड़ 37 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। मेहनत से जमा की गई बचत, भविष्य की जरूरतों और परिवार के खर्चों के लिए रखी गई रकम ऑनलाइन लेनदेन, फोन-पे और नकद के जरिए ली गई। इस मामले में मीरा गोविंद साठे और प्रसाद गोविंद साठे, दोनों निवासी चौधरीनगर, लातूर के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। रकम वापस नहीं मिलने से संबंधित महिलाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

इस मामले में प्रकाशनगर निवासी शैलजा रामराव शिंदे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर 2025 के बीच मीरा साठे और प्रसाद साठे ने प्रकाशनगर इलाके के एक साड़ी सेंटर में ठहरकर महिला बचत समूहों की सदस्यों से संपर्क बढ़ाया। इस दौरान उन्होंने महिलाओं का विश्वास हासिल किया और उनकी रकम दोगुनी करके लौटाने का लालच दिया।

शिकायत में बताया गया है कि इस आश्वासन पर भरोसा करके महिलाओं ने फोन-पे, ऑनलाइन लेनदेन और नकद के माध्यम से बड़ी रकम दी। हालांकि, उन्हें अपेक्षित रिटर्न नहीं मिला, जिसके बाद कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया। शैलजा शिंदे के एकता महिला बचत समूह की सदस्यों के अलावा अन्य बचत समूहों की महिलाएं भी इस मामले में आर्थिक नुकसान की शिकार हुई हैं।

शिकायत में अलग-अलग महिलाओं की ओर से दी गई रकम का विवरण भी सामने आया है। शैलजा रामराव शिंदे और एकता महिला बचत समूह की ओर से फोन-पे के माध्यम से 5 लाख 19 हजार रुपये तथा गोल्ड लोन के जरिए 44 लाख 70 हजार रुपये दिए गए। इस तरह कुल 49 लाख 89 हजार रुपये की रकम का उल्लेख किया गया है।

अन्य महिलाओं में अनिता प्रविणकुमार नवलखेले के करीब 11 लाख रुपये, बबीता अशोक गायकवाड़ के 8 लाख रुपये, मंगल डेढ़े के 6 लाख रुपये और वर्षा आगवणे के 7 लाख रुपये शामिल हैं। इसके अलावा सुजाता बालासाहेब टेंकाळे के 35 लाख रुपये और संगीता रामराजे खोसे के 22 लाख रुपये की रकम भी शिकायत में दर्ज है।

शिकायत के मुताबिक, इन सभी मामलों में महिलाओं की कुल करीब 1 करोड़ 37 लाख रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी हुई है। पुलिस ने इस मामले में अपराध दर्ज कर लिया है। आगे की जांच में इन आर्थिक लेनदेन से जुड़ी अन्य जानकारियां सामने आने की संभावना है।

महिला बचत समूह महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इनके जरिए महिलाएं घरेलू खर्चों के बीच थोड़ी-थोड़ी रकम बचाती हैं, छोटे-बड़े कारोबार के लिए पूंजी जुटाती हैं और परिवार की भविष्य की जरूरतों के लिए आर्थिक व्यवस्था करती हैं।

ऐसे में पैसे दोगुने करने के लालच में इतनी बड़ी रकम की कथित धोखाधड़ी ने महिला बचत समूहों की आर्थिक सुरक्षा से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में गोल्ड लोन के माध्यम से जुटाई गई रकम भी शामिल है, जिससे संबंधित महिलाओं पर आर्थिक दबाव और गंभीर हो सकता है।

जिन पैसों को परिवार की जरूरतें पूरी करने, बच्चों की शिक्षा और भविष्य में आने वाली मुश्किलों से निपटने के लिए सुरक्षित रखा गया था, उनके कथित तौर पर डूबने से महिलाओं को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। बचत समूहों की सदस्य महिलाओं के लिए यह नुकसान उनकी जमा पूंजी तक सीमित नहीं है, बल्कि परिवार की भविष्य की आर्थिक योजनाओं को भी प्रभावित कर सकता है।

महिला बचत समूहों का उद्देश्य बचत की आदत विकसित करना, स्वरोजगार को बढ़ावा देना और महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले उसकी प्रामाणिकता और प्रस्तावित रिटर्न की पुष्टि करना जरूरी है।

कम समय में रकम दोगुनी करने का आश्वासन, असामान्य रिटर्न की गारंटी और जल्दबाजी में पैसे जमा करने का दबाव आर्थिक धोखाधड़ी के संभावित संकेत हो सकते हैं। ऐसे प्रस्तावों पर भरोसा करने से पहले संबंधित दस्तावेजों की जांच करना, लेनदेन की रसीदें सुरक्षित रखना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत पुलिस को शिकायत देना महत्वपूर्ण है।

लातूर की इस घटना ने जिले के महिला बचत समूहों के सामने आर्थिक लेनदेन में सतर्कता बरतने की जरूरत को रेखांकित किया है। महिला बचत समूहों की कार्यप्रणाली में आपसी विश्वास महत्वपूर्ण है, लेकिन वित्तीय लेनदेन की पुष्टि और सावधानी भी उतनी ही जरूरी है।

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