नाशिक में सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण से पहले 501 लोगों के सामूहिक शंखनाद की तैयारी।

सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण से पहले नाशिक में 501 लोगों के सामूहिक शंखनाद के जरिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है। कल 25 अक्टूबर को कोजागरी पूर्णिमा के शुभ अवसर पर गोदावरी नदी के तट पर देवमामलेदार मैदान के पास यह आयोजन होगा। इसका उद्देश्य एक साथ शंखनाद करने वाले 303 लोगों के मौजूदा दर्ज रिकॉर्ड को पीछे छोड़ना है।

नाशिक त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण और गुणगौरव न्यास द्वारा संचालित अनंतविजय शंखनाद दल की पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। भारतीय धार्मिक परंपरा में शुभ कार्यों की शुरुआत शंखनाद से करने का विशेष महत्व है। ऐसे में सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण से पहले होने वाला यह सामूहिक शंखनाद सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पहल के माध्यम से प्राचीन परंपरा को जीवंत रखने के साथ नाशिक की सांस्कृतिक विरासत को भी प्रदर्शित करने का प्रयास किया जाएगा।

नाशिक त्र्यंबकेश्वर कुंभमेला प्राधिकरण के आयुक्त शेखर सिंह ने कहा कि शंखनाद हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शुभ कार्यों की शुरुआत शंखनाद से करने की परंपरा रही है। सिंहस्थ कुंभमेले की पृष्ठभूमि में 501 लोगों का एक साथ शंखनाद करना नाशिक के लिए विशेष क्षण होगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से विश्व रिकॉर्ड बनाने के साथ अपनी परंपरा को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने की अपेक्षा है।

शेखर सिंह के अनुसार, 31 अक्टूबर को सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण के ठीक समय इसी समूह के 251 शंखवादक शंखनाद करेंगे। इससे शंखनाद की प्राचीन परंपरा को सिंहस्थ कुंभमेले के मंगलारंभ से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

विश्व रिकॉर्ड बनाने के प्रयास के लिए कल शाम चार बजे से प्रतिभागियों का पंजीकरण, उपस्थिति की जांच और सत्यापन किया जाएगा। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम द्वारा प्रतिभागियों की जांच और सत्यापन पूरा होने के बाद रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया जाएगा। यह प्रक्रिया शाम छह बजे से पहले पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके बाद शाम सात बजे गोदा आरती शुरू होगी। सामूहिक शंखनाद और गोदा आरती के आयोजन से गोदावरी नदी के तट पर भक्तिमय वातावरण बनेगा। सिंहस्थ कुंभमेले के ध्वजारोहण से पहले आयोजित यह कार्यक्रम विश्व रिकॉर्ड के प्रयास के साथ नाशिक की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को भी सामने लाएगा।

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