समुद्रपुर पंचायत समिति में आयोजित निपुण कार्यशाला में मार्गदर्शन देते शिक्षक व अधिकारीगण।

महाराष्ट्र के वर्धा जिले में प्रत्येक विद्यार्थी को अपेक्षित निपुण स्तर तक पहुंचाने के लिए शिक्षा विभाग ने प्रयास तेज किए हैं। इसी उद्देश्य से समुद्रपुर पंचायत समिति के अंतर्गत तालुकास्तरीय निपुण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्याध्यापकों और शिक्षकों को विद्यार्थियों का अध्ययन स्तर निर्धारित करने, निपुण परीक्षा का नियमित अभ्यास कराने और पढ़ाई में आ रही कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपचारात्मक अध्यापन की जानकारी दी गई।

यह कार्यशाला वर्धा जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पराग सोमन (भा.प्र.से.) की प्रेरणा से आयोजित की गई। इसमें कक्षा दूसरी से पांचवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों को विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता का आकलन करने और उनकी जरूरतों के अनुसार शैक्षणिक उपाय लागू करने के बारे में मार्गदर्शन दिया गया। जिले के प्रत्येक विद्यार्थी को अपेक्षित अध्ययन क्षमता हासिल कराने के लिए शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में जिला स्तर पर निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार तालुका स्तर पर निपुण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

कार्यशाला में जिला निपुण समन्वयक राजेंद्र मस्के ने अध्ययन-अध्यापन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के लिए मिशन के रूप में काम करने का आह्वान किया। उन्होंने केंद्र प्रमुखों और कक्षा शिक्षकों को बताया कि विद्यार्थियों का अध्ययन स्तर कैसे निर्धारित किया जाए, उनकी पढ़ाई में आने वाली कठिनाइयों की पहचान कैसे की जाए और उन कठिनाइयों को दूर करने के लिए किस प्रकार शैक्षणिक सहायता दी जाए। इस विषय पर उन्होंने विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी किया।

विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति बेहतर बनाने के लिए नियमित निपुण परीक्षा अभ्यास, अध्ययन स्तर के अनुसार शैक्षणिक सामग्री के उपयोग और उपचारात्मक अध्यापन तकनीकों के माध्यम से अध्ययन संबंधी कमियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को ऐसी शैक्षणिक प्रक्रियाओं से अवगत कराना था, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता का आकलन कर उनकी जरूरतों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा सके।

इस अवसर पर समुद्रपुर पंचायत समिति के खंड शिक्षा अधिकारी ललितकुमार बारसागडे और शिक्षा विस्तार अधिकारी विनोद पालवे ने भी शिक्षकों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने विद्यार्थियों की अध्ययन प्रगति की नियमित समीक्षा करने और जरूरत के अनुसार आवश्यक शैक्षणिक उपाय लागू करने के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यशाला में विस्तार अधिकारी राहुल महाबुधे और समीर वाघमारे, सभी केंद्र प्रमुख, विषय साधन व्यक्ति, विशेष शिक्षक तथा कक्षा दूसरी से पांचवीं तक पढ़ाने वाले विद्यालयों के मुख्याध्यापक और शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यशाला का प्रास्ताविक समूह समन्वयक संजय ढोक ने किया।

कार्यशाला के सफल आयोजन में नरेंद्र फरताडे, गजानन साटोणे, श्रीकांत कावटे, अनिता उगे, गजानन वैद्य, संदीप वाघमारे और दिनेश बारई ने सहयोग किया। विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता विकसित करने और प्रत्येक विद्यार्थी को अपेक्षित निपुण स्तर तक पहुंचाने के लिए इस कार्यशाला के माध्यम से शिक्षकों को नियोजित प्रयास, नियमित अभ्यास और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप उपचारात्मक अध्यापन की दिशा प्रदान की गई।

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